आईपीओ लाने की तैयारी में CARS24! बिजनेस टुडे से खास बातचीत में कंपनी के CFO ने बताया बड़ा प्लान - Details
कंपनी के सीएफओ शिवांशु मक्कर ने बिजनेस टुडे से बातचीत में कहा कि आईपीओ की प्रक्रिया चल रही है और तय समयसीमा में इसका ऐलान किया जाएगा।

सेकेंड हैंड कार की खरीद-बिक्री करने वाली कंपनी, CARS24 अगले 12 से 18 महीनों में आईपीओ लाने की तैयारी में है। कंपनी के सीएफओ शिवांशु मक्कर ने बिजनेस टुडे से बातचीत में कहा कि आईपीओ की प्रक्रिया चल रही है और तय समयसीमा में इसका ऐलान किया जाएगा। उनका कहना है कि भले ही हाल के महीनों में कुछ नीतिगत बदलावों से दबाव आया हो, लेकिन कंपनी का फोकस अब साफ तौर पर प्रॉफिटेबिलिटी पर है।
मक्कर ने बताया कि नई कारों पर जीएसटी में हालिया कटौती से कंपनी को थोड़े समय के लिए झटका लगा। नई गाड़ियों के दाम घटने से CARS24 के पास पहले से खरीदे गए महंगे स्टॉक पर दबाव आया। हालांकि यह असर ज्यादा दिन नहीं रहा। मक्कर के मुताबिक दिसंबर कंपनी के लिए मुनाफे के लिहाज से अब तक का सबसे अच्छा महीना साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि भारत के यूज्ड कार बाजार में अब स्ट्रक्चरल बदलाव साफ दिखने लगे हैं और संगठित प्लेटफॉर्म तेजी से हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। मक्कर ने बताया कि अगले तीन से चार साल में CARS24 करीब डबल डिजिट मार्केट शेयर तक पहुंचने का टारगेट रखता है। उन्होंने कहा कि हम आज भारत में सबसे बड़े खिलाड़ी हैं और 3 - 4 साल में करीब 10 फीसदी बाजार हिस्सेदारी का टारगेट है।
जहां पूरी यूज्ड कार इंडस्ट्री 10-12 फीसदी की दर से बढ़ रही है, वहीं CARS24 लगभग दोगुनी रफ्तार से ग्रोथ का टारगेट लेकर चल रहा है। इसके पीछे रिटेल विस्तार, फाइनेंसिंग और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को अहम वजह बताया गया है।
कंपनी के फाइनेंशियल
H1 FY26 में CARS24 की एडजस्टेड नेट रेवेन्यू सालाना आधार पर 18 फीसदी बढ़कर 651 करोड़ रुपये रही, जबकि एडजस्टेड EBITDA लॉस 36 फीसदी घटकर 162 करोड़ रुपये रह गया। इसी अवधि में भारत, यूएई और ऑस्ट्रेलिया में करीब 85 हजार कार ट्रांजैक्शन हुए। कंपनी FY26 में 1.8 लाख से ज्यादा कार सौदों के ट्रैक पर है।
रिटेल सेगमेंट मुनाफे का बड़ा आधार बना हुआ है। मक्कर के मुताबिक H1 में भारत, ऑस्ट्रेलिया और यूएई में रिटेल मार्जिन 3-4 फीसदी प्वाइंट बढ़े हैं।
टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश से ऑपरेटिंग खर्च भी करीब 1 फीसदी घटा है। फाइनेंसिंग बिजनेस में भी मजबूती दिखी है। H1 FY26 में प्लेटफॉर्म के जरिए लोन डिस्बर्सल 38 फीसदी बढ़कर 1,637 करोड़ रुपये पहुंच गया।

