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Budget 2026: इस बार हेल्थकेयर सेक्टर को क्या उम्मीदें? एक्सपर्ट्स ने बताए अहम सुझाव

Union Budget 2026: आगामी 1 फरवरी के बजट के पेश होने से पहले देश के अलग-अलग सेक्टर के एक्सपर्ट्स अपनी उम्मीदों को शेयर कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको बताएंगे की इस बार के बजट से हेल्थकेयर सेक्टर (Healthcare Sector) को क्या उम्मीदें हैं?

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Union Budget 2026: आगामी 1 फरवरी के बजट के पेश होने से पहले देश के अलग-अलग सेक्टर के एक्सपर्ट्स अपनी उम्मीदों को शेयर कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको बताएंगे की इस बार के बजट से हेल्थकेयर सेक्टर (Healthcare Sector) को क्या उम्मीदें हैं?

ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, डॉ. जी.एस.के. वेलू  ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026–27 के मौके पर भारत को अब नीतियों से आगे बढ़कर ज़मीनी अमल पर फोकस करना होगा। देश में नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज से करीब 65% मौतें होती हैं, इसलिए सरकारी स्वास्थ्य खर्च को GDP के 2.5% से अधिक करना जरूरी है। मेडिकल डिवाइस पर GST घटाने के बाद अब इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक किया जाना चाहिए, जैसे रेडिएशन प्रोटेक्शन अपैरल्स पर 18% की जगह 5% GST। 80% इंपोर्ट निर्भरता घटाने के लिए ‘Buy India’ और रिसर्च इंसेंटिव बढ़ें। टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण इलाकों में डायग्नोस्टिक व आई-केयर इंफ्रास्ट्रक्चर, साथ ही AI-आधारित प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को बजट में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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विएरूट्स के संस्थापक और अध्यक्ष, डॉ. सजीव नायर  ने कहा कि भारत अब इलाज-केंद्रित हेल्थकेयर से आगे बढ़कर प्रिवेंटिव और प्रिडिक्टिव वेलनेस की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में केंद्रीय बजट इस बदलाव को तेज करने का बड़ा अवसर है। बजट में AI-आधारित हेल्थ प्लेटफॉर्म, डिजिटल डायग्नोस्टिक्स और पर्सनलाइज्ड वेलनेस सॉल्यूशंस को मजबूत नीतिगत और वित्तीय समर्थन मिलना चाहिए, जो जीनोमिक्स, बायोमार्कर और रियल-टाइम हेल्थ डेटा पर आधारित हों। AI, डेटा साइंस और प्रिवेंटिव केयर पर काम करने वाले हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने से बीमारियों की शुरुआती पहचान संभव होगी और लंबे समय में इलाज का खर्च घटेगा। साथ ही, वियरेबल्स, रिमोट मॉनिटरिंग और डिजिटल थैरेप्यूटिक्स को इंश्योरेंस और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप से जोड़ना जरूरी है। मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और एथिकल AI फ्रेमवर्क से भारत एक सुलभ और स्केलेबल वेलनेस इकोसिस्टम बना सकता है।

नूरा - एआई हेल्थ स्क्रीनिंग सेंटर के संस्थापक, मासाहारू मोरिता ने कहा कि केंद्रीय बजट से पहले भारत के पास हेल्थकेयर को इलाज से आगे बढ़ाकर रोकथाम और शुरुआती पहचान पर केंद्रित करने का बड़ा मौका है। नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कई बीमारियां देर से पकड़ में आती हैं। स्ट्रक्चर्ड स्क्रीनिंग प्रोग्राम और टेक्नोलॉजी आधारित रिस्क असेसमेंट से बीमारी की समय रहते पहचान हो सकती है, जिससे इलाज बेहतर होगा और अनावश्यक अस्पताल में भर्ती कम होगी। बजट में प्रिवेंटिव हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रेनिंग और डेटा आधारित स्क्रीनिंग को समर्थन मिलना चाहिए। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और प्राइमरी केयर में स्क्रीनिंग को जोड़ना ज़रूरी है। शुरुआती पहचान और प्रिवेंटिव केयर को प्राथमिकता देने वाला बजट भारत को इलाज-केंद्रित सोच से निकालकर एक स्वस्थ, किफायती और टिकाऊ हेल्थ सिस्टम की ओर ले जा सकता है।