
Russia तेल पर फिर बवाल, यूरोपियन यूनियन को भारत का कराड़ा जबाब
रूसी तेल का मुद्दा एक बार फिर उबल गया है। एक बार फिर यूरोपियन यूनियन ने इस मामले में भारत को न सिर्फ घसीटा है बल्कि कार्रवाई की भी बात कही है। लेकिन भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने भी इस धमकी का करारा जवाब दिया है। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस पर ऐसा काउंटर जवाब दिया कि उनकी बोलती बंद हो गई।

Russia तेल का मुद्दा एक बार फिर उबल गया है। एक बार फिर यूरोपियन यूनियन ने इस मामले में भारत को न सिर्फ घसीटा है बल्कि कार्रवाई की भी बात कही है। लेकिन भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने भी इस धमकी का करारा जवाब दिया है। क्या है मामला आइये समझते हैं। पिछले एक साल में अमेरिका समेत यूरोपियन यूनियन ने रूसी अर्थव्यवस्था को चौपट करने के लिए कई तरह के व्यापार अंकुश लगाए। लेकिन कहीं न कहीं यूरोपियन यूनियन को इस मामले में इसलिए सफलता नहीं मिली क्योंकि भारत रूस की मदद के लिए खड़ा रहा। ये ही बात यूरोपियन यूनियन को नागवार गुजरी है। दरअसल रूस पर लगे कई प्रतिबंधों में से एक प्रतिबंध ये भी था कि रूस से यूरोपियन देश तेल नहीं खरीदेंगे। इस तरह के सेंक्शन से पहले यूरोप रूस से अपनी जरूरत का 30 प्रतिशत तेल खरीदता आ रहा था। लेकिन इस फैसले के बाद से यूरोप की तेल रिफाइनिंग कंपनियों के सामने प्रोडक्शन की बड़ी समस्या पैदा हो गई है। ऐसे में यूरोप ने भारत से मदद मांगी और भारत ने रूसी तेल को रिफाइंड करके यूरोप को तेल बेचा। यानि यूरोप ने रूस से भले ही सीधा तेल न खरीदा हो लेकिन भारत के जरिए ही उस तेल की खरीदारी किया। जिसके बाद उनकी पूरी दुनिया में काफी किरकिरी हुई। अब इसी बात EU बौखला गया है और भारत पर कार्रवाई की बात रह रहा है।
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सुनिए यूरोपियन यूनियन के सर्वोच्च प्रतिनिधि जोसेप बोरेल ने क्या कहा? उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि भारतीय रिफाइनरीज भारी मात्रा में रूस ये कच्चा तेल खरीद रही हैं। फिर इसे प्रोसेस करके यूरोप को बेच रही हैं। ये निश्चित तौर से प्रतिबंधों का उल्लंघन है और सदस्य देशों को इससे निपटना होगा। ऐसे में यूरोपियन यूनियन को भारत पर कड़ा कदम उठाने की जरूरत है। इंटरव्यू के अनुसार यूरोपियन यूनियन के सर्वोच्च प्रतिनिधि भारत को धमका रहे हैं और भारत पर ही कार्रवाई की बात कर रहे हैं। जबकि यूरोपीय देशों ने धड़ल्ले से भारत से रूसी तेल खरीदा। लेकिन बात यही खत्म नहीं हुई क्योंकि अब भारत का जवाब आना बाकि था। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस पर ऐसा काउंटर जवाब दिया कि उनकी बोलती बंद हो गई।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पर खास प्रतिक्रिया दी। जयशंकर ने कहा, मुझे आपके सवाल का कोई आधार नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि मुझे जहां तक परिषद के नियमों की समझ है उसके मुताबिक अगर रूस का कच्चा तेल किसी तीसरे देश में बदला जा रहा है या तब्दील किया जा रहा है तो फिर यह रूसी तेल नहीं समझा जाएगा। जयशंकर यही नहीं रूके बल्कि उन्होंने EU काउंसिल के नियम खासतौर पर 833/2014 की याद दिलाई। इस नियम के तहत ये स्पष्ट है कि रूस से आने वाला कच्चा तेल अगर किसी तीसरे देश में प्रॉसेस से गुजरता है तो फिर उसे रूसी तेल नहीं समझा जाएगा। जयशंकर का ये बयान पूरी दुनिया में तालियां बटोर रहा है। ऐसे में एक बार फिर पश्चिमी देशों का भारत को गलत ठहराने का मंसूबा गलत साबित हुआ है।
