scorecardresearch

ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया में बढ़ी ब्रह्मोस मिसाइल की डिमांड! रूस को भी सप्लाई करने की तैयारी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया में ब्रह्मोस मिसाइल की डिमांड तेजी से बढ़ी है। ब्रह्मोस के CEO डॉ. जयतीर्थ आर जोशी ने मिसाइल की ताकत, नए वर्जन और विदेशी सौदों को लेकर बड़े खुलासे किए। आखिर किन देशों की नजर है ब्रह्मोस पर और क्या है भारत की तैयारी?

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनियाभर में ब्रह्मोस मिसाइल की डिमांड तेजी से बढ़ी।
  • वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की डील अंतिम चरण में।
  • - रूस को भी ब्रह्मोस मिसाइल सप्लाई करने की तैयारी, बातचीत जारी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की ब्रह्मोस मिसाइल एक बार फिर चर्चा में है। इसकी ताकत और सटीक निशाने ने दुनिया के कई देशों का ध्यान खींचा है। अब भारत इस मिसाइल को और ज्यादा एडवांस बनाने के साथ दूसरे देशों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है।  इंडिया टुडे के पत्रकार मंजीत नेगी की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रह्मोस के CEO डॉ. जयतीर्थ आर जोशी ने इसके इस्तेमाल, बढ़ती डिमांड, नई टेक्नोलॉजी और भविष्य की योजनाओं को लेकर कई अहम बातें बताई हैं।

advertisement

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के ठिकानों पर किया हमला

डॉ. जयतीर्थ आर जोशी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30 लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के ठिकानों को निशाना बनाया। उनके मुताबिक, मिसाइल ने दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमला किया। इसकी सटीकता की चर्चा पूरी दुनिया में हुई। उन्होंने ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे घातक मिसाइल बताया।

तीनों सेनाओं के पास है ब्रह्मोस मिसाइल

जोशी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों ब्रह्मोस मिसाइल से लैस थीं। इसकी नेटवर्क सेंट्रिक क्षमता के कारण तीनों सेनाएं इसका इस्तेमाल कर सकती हैं। ब्रह्मोस को जमीन, युद्धपोत और लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जा सकता है।

ये खबर पढ़ना ना भूलें: कोर सेक्टर की ग्रोथ में बड़ा उछाल, सितंबर में 7.9% की बढ़त, रिफाइनरी सेक्टर ने भी पकड़ी रफ्तार

ब्रह्मोस को पूरी तरह स्वदेशी बनाने की तैयारी

ब्रह्मोस मिसाइल को पूरी तरह स्वदेशी बनाने पर काम चल रहा है। जोशी के मुताबिक, सबसे पहले इसे नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात किया गया था। इसके बाद सेना को इसका लैंड वर्जन दिया गया और फिर इसे सुखोई लड़ाकू विमान पर तैनात किया गया।

सुखोई पर लगेगा ब्रह्मोस का नया वर्जन

भारत अब सुखोई लड़ाकू विमान पर ब्रह्मोस का नेक्स्ट जेनरेशन वर्जन तैनात करने की तैयारी कर रहा है। जोशी ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। इसके साथ ही मिसाइल की रेंज बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।

वियतनाम और इंडोनेशिया से डील अंतिम चरण में

ब्रह्मोस मिसाइल के एक्सपोर्ट का पहला समझौता फिलीपींस के साथ हुआ था। अब वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ भी मिसाइल सौदे अंतिम चरण में हैं। जोशी के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंटरनेशनल मार्केट में ब्रह्मोस की डिमांड काफी बढ़ गई है।

तीन फैक्ट्रियों में बन रही ब्रह्मोस मिसाइल

फिलहाल ब्रह्मोस की तीन फैक्ट्रियां पिलानी, नागपुर और लखनऊ में हैं। इससे 300 से ज्यादा MSME इंडस्ट्री जुड़ी हुई हैं। जोशी ने कहा कि कंपनी भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की जरूरतें पूरी करने में सक्षम है।

advertisement

रूस को भी ब्रह्मोस सप्लाई करने की तैयारी

जोशी ने बताया कि भारत सरकार और रूस के बीच समझौते के तहत कंपनी रूसी सेना को भी ब्रह्मोस मिसाइल सप्लाई करने के लिए तैयार है। इस संबंध में बातचीत चल रही है।