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Transparent Cooling Glass: तेज धूप में भी घर को रखेगा 5 डिग्री तक ठंडा, जानें कैसे करेगा काम

वैज्ञानिकों ने खिड़की के शीशे के लिए एक खास परत तैयार की है, जो बिना बिजली के कमरे का तापमान करीब 4.8 डिग्री तक कम कर सकती है। यह परत सूरज की तेज गर्मी को बाहर ही रोक देती है, लेकिन घर के अंदर रोशनी आने देती है। इससे AC का इस्तेमाल और बिजली का बिल दोनों कम हो सकते हैं।

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In Short

  • बिना बिजली और मशीन के कमरे का तापमान करीब 4.8 डिग्री तक कम कर सकता है खास शीशा।
  • सूरज की तेज गर्मी को बाहर रोकेगा, लेकिन घर के अंदर प्राकृतिक रोशनी आती रहेगी।
  • 336 घंटे तेज धूप में रहने के बाद भी शीशे की खास परत पर बहुत कम असर पड़ा।

transparent cooling technology: गर्मी के दिनों में घर को ठंडा रखने के लिए ज्यादातर लोग AC या कूलर चलाते हैं। इससे गर्मी से राहत तो मिलती है, लेकिन बिजली का बिल भी काफी बढ़ जाता है। अब वैज्ञानिकों ने खिड़की के शीशे के लिए एक खास परत बनाई है। यह परत बिना बिजली के कमरे की गर्मी कम कर सकती है। जांच के दौरान इस तकनीक से कमरे का तापमान करीब 4.8 डिग्री तक कम पाया गया।

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कमरे में गर्मी आने से रोकेगा शीशा 

आमतौर पर जब खिड़की के शीशे पर धूप पड़ती है, तो शीशा गर्म हो जाता है। इसके बाद उसकी गर्मी धीरे-धीरे कमरे के अंदर आने लगती है और कमरा ज्यादा गर्म हो जाता है। आपने देखा होगा कि धूप में खड़ी कार के अंदर भी कुछ ही देर में काफी गर्मी हो जाती है।

नई तकनीक में शीशे के ऊपर एक खास परत लगाई जाती है। यह परत सूरज की गर्मी को वापस बाहर की तरफ भेज देती है। इससे खिड़की का शीशा ज्यादा गर्म नहीं होता और कमरे के अंदर भी कम गर्मी पहुंचती है।

बिना बिजली कैसे ठंडा रहेगा कमरा?

इस तकनीक को चलाने के लिए न बिजली चाहिए और न ही किसी मशीन की जरूरत होती है। शीशे पर लगी खास परत दिन के समय सूरज की तेज गर्मी को रोकती है। साथ ही, यह कमरे के अंदर की गर्मी को बाहर निकालने में भी मदद करती है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच के दौरान इस शीशे ने आम खिड़की के मुकाबले कमरे का तापमान 4.8 डिग्री तक कम रखा। इसका मतलब है कि हल्की या रोज़मर्रा की गर्मी में AC चलाने की जरूरत कम हो सकती है।

रात में ज्यादा ठंडा नहीं होगा कमरा

पुरानी कूलिंग तकनीक में एक बड़ी परेशानी थी। वह रात में भी कमरे को ठंडा करती रहती थी। इससे कई बार कमरा जरूरत से ज्यादा ठंडा हो जाता था।

नई तकनीक में इस परेशानी को दूर करने की कोशिश की गई है। यह खास परत दिन के समय थोड़ी गर्मी अपने अंदर रखती है और रात में उसे धीरे-धीरे बाहर छोड़ती है। इससे रात में कमरे का तापमान सामान्य से केवल 0.6 डिग्री कम रहता है।

धूप धूल और बारिश में भी नहीं होगी खराब

खिड़की के शीशे को रोज धूप, धूल और बारिश का सामना करना पड़ता है। इसलिए उस पर लगी परत का मजबूत होना बहुत जरूरी है।

जांच के दौरान इस परत को 336 घंटे तक सूरज की तेज किरणों में रखा गया। इसके बाद भी इसकी काम करने की ताकत में केवल 0.6 प्रतिशत की कमी आई। धूल और मौसम बदलने के बाद भी इस तकनीक पर सिर्फ 1 प्रतिशत असर पड़ा।

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इससे पता चलता है कि यह खास परत लंबे समय तक काम कर सकती है और जल्दी खराब नहीं होगी।