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सस्ता इंटरनेट खत्म? सरकार डेटा इस्तेमाल पर लगा सकती है नया टैक्स, हर GB पर देना पड़ सकता है पैसा

आजतक ने सूत्रों के हवाले से बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) को इस मामले में एक डिटेल स्टडी करने का जिम्मा सौंपा गया है। विभाग यह जांचेगा कि क्या डेटा खपत पर टैक्स लगाना व्यावहारिक है या नहीं। अगर हां, तो इसका ढांचा कैसा होना चाहिए।

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In Short

  • सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर ₹1 प्रति GB तक टैक्स लगाने के विकल्प का अध्ययन कर रही है।
  • इस प्रस्ताव से सरकारी खजाने में हर साल करीब ₹22,900 करोड़ की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।
  • फिलहाल DoT को मॉडल और व्यवहारिकता पर स्टडी करने को कहा गया है, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

भारत में सस्ता इंटरनेट अब बीते दिनों की बात हो सकती है। सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर एक नया टैक्स लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। आजतक ने सूत्रों के हवाले से बताया कि दूरसंचार विभाग (DoT) को इस मामले में एक डिटेल स्टडी करने का जिम्मा सौंपा गया है। विभाग यह जांचेगा कि क्या डेटा खपत पर टैक्स लगाना व्यावहारिक है या नहीं। अगर हां, तो इसका ढांचा कैसा होना चाहिए।

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रिव्यू मीटिंग में उठा मुद्दा

यह पूरा मामला हाल ही में टेलीकॉम सेक्टर की एक उच्च स्तरीय रिव्यू मीटिंग के दौरान सामने आया। मीटिंग में चर्चा हुई कि मोबाइल डेटा के बेतहाशा इस्तेमाल को राजस्व का जरिया बनाया जा सकता है। इसके तुरंत बाद विभाग को निर्देश दिए गए कि वे इस टैक्स के मॉडल पर अपनी रिपोर्ट तैयार करें। फिलहाल सरकार इस विकल्प को टटोल रही है कि क्या प्रति GB डेटा के हिसाब से चार्ज वसूला जा सकता है।

सरकारी खजाने में आएगी भारी रकम

प्रस्ताव के मुताबिक, सरकार प्रति 1 GB डेटा के इस्तेमाल पर ₹1 का टैक्स लगा सकती है। अगर यह फॉर्मूला लागू होता है, तो हर बार इंटरनेट इस्तेमाल करने पर यूजर की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

अनुमान है कि ₹1 प्रति GB के इस छोटे दिखने वाले टैक्स से सरकार को हर साल लगभग ₹22,900 करोड़ की बड़ी कमाई हो सकती है। हालांकि, वित्त विश्लेषकों का कहना है कि अभी यह सिर्फ एक शुरुआती प्रस्ताव है और सरकार ने इस पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

यूजर्स की जेब पर डबल मार

भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां डेटा की कीमतें सबसे कम हैं। यही वजह है कि यहां रील्स, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग की वजह से डेटा की खपत रिकॉर्ड स्तर पर है।

वर्तमान में मोबाइल रिचार्ज और पोस्टपेड बिलों पर पहले से ही 18% GST लागू है। अगर डेटा टैक्स अलग से आता है, तो यह मौजूदा टैक्स के ऊपर एक नया बोझ होगा। फिलहाल, सोशल मीडिया और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर इस खबर को लेकर काफी चर्चा है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।