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पेट्रोल पंप पर अकसर होते हैं ये 3 तरह के स्कैम! पलक झपकते ही लग जाता है चूना - ऐसे रहें सतर्क

कई शहरों से कम फ्यूल देना, मीटर से छेड़छाड़ या ध्यान भटकाकर कम पेट्रोल डालने जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

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AI Generated Image

Petrol Pump Scam: अकसर आपके रील या शॉर्ट वीडियो पर कोई न कोई एक ऐसी रील जरूर आई होगी जिसमें पेट्रोल पंप के धोखाधड़ी के बारे में बताया गया होगा। कई शहरों से कम फ्यूल देना, मीटर से छेड़छाड़ या ध्यान भटकाकर कम पेट्रोल डालने जैसी शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

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आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे की अकसर पेट्रोल पंप पर कौन-कौन से स्कैम होते हैं और आप इनसे कैसे बच सकते हैं?

कौन-कौन से आम स्कैम होते हैं?

सबसे आम तरीका है मीटर जीरो न करना । कर्मचारी जल्दी-जल्दी में पिछले रीडिंग से ही पेट्रोल भरना शुरू कर देता है। ग्राहक को लगता है कि मीटर जीरो से शुरू हुआ है, जबकि कुछ रकम पहले से जुड़ी होती है।

दूसरा तरीका है ध्यान भटकाना । जैसे ही आप राशि बताते हैं, कर्मचारी किसी और से बात करने लगता है या आपसे कैश, कार्ड या UPI के बारे में पूछकर आपका ध्यान दूसरी तरफ कर देता है। इसी बीच कम फ्यूल डाल दिया जाता है।

कुछ मामलों में शॉर्ट डिलीवरी  यानी मशीन में तकनीकी छेड़छाड़ की शिकायत भी आती है, जिससे दिखने में पूरा पेट्रोल लगता है लेकिन असल में मात्रा कम होती है।

खुद को ऐसे रखें सुरक्षित

सबसे पहले, पेट्रोल भरवाने से पहले मीटर जीरो जरूर देखें। जब तक डिस्प्ले 0.00 न दिखे, फ्यूल डलवाना शुरू न होने दें।

दूसरा, अमाउंट स्पष्ट और एक बार में बताएं। अगर आपने 1000 रुपये का पेट्रोल कहा है तो बीच में राशि न बदलें। बार-बार रकम बदलने से भ्रम की स्थिति बन सकती है।

तीसरा, फ्यूल भरते समय मोबाइल या बातचीत में व्यस्त न रहें। पूरा ध्यान मीटर और नोजल पर रखें। अगर शक हो तो तुरंत उसी समय आपत्ति दर्ज कराएं।

चौथा, बड़े पेट्रोल पंप या अधिक भीड़ वाले समय में फ्यूल भरवाना थोड़ा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि वहां निगरानी ज्यादा होती है।

अगर धोखाधड़ी हो जाए तो शिकायत कैसे करें?

अगर आपको कम फ्यूल मिलने या किसी गड़बड़ी का संदेह है, तो तुरंत पंप मैनेजर से बात करें। हर पेट्रोल पंप पर शिकायत रजिस्टर और हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध होते हैं। जरूरत पड़े तो संबंधित तेल कंपनी की कस्टमर केयर या सरकारी उपभोक्ता हेल्पलाइन पर भी शिकायत की जा सकती है।