scorecardresearch

EPF Passbook Lite और EPFO के रेगुलर पासबुक में क्या है अंतर? एक क्लिक में दूर करें कन्फ्यूजन

कई लोगों को अभी भी EPFO Passbook Lite और EPFO के रेगुलर Passbook में काफी उलझन है। इस आर्टिकल में हम आपको काफी आसान शब्दों में यह बताएंगे की EPFO Passbook Lite और Passbook में क्या अंतर है। 

Advertisement

EPF Passbook: हाल ही में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने Passbook Lite लॉन्च किया था। पासबुक लाइट के जरिए ईपीएफ कर्मचारी ऐसे कई काम तेज और आसान तरीके से कर सकते हैं जिसके लिए पहले उन्हें ईपीएफ पासबुक के एक अलग वेबसाइट पर जाना पड़ता था।

हालांकि कई लोगों को अभी भी EPFO Passbook Lite और EPFO के रेगुलर Passbook में काफी उलझन है। इस आर्टिकल में हम आपको काफी आसान शब्दों में यह बताएंगे की EPFO Passbook Lite और Passbook में क्या अंतर है। 

advertisement

सम्बंधित ख़बरें

EPFO Passbook Lite क्या है?

यह EPF पासबुक का एक सरल और हल्का वर्जन है। पहले PF खाताधारकों को अपनी पासबुक देखने के लिए अलग वेबसाइट पर लॉग-इन करना पड़ता था। अब Passbook Lite की मदद से सदस्य Member Portal पर ही अपने PF खाते की जरूरी जानकारी देख सकते हैं।

इसमें कुल बैलेंस, कर्मचारी और कंपनी का योगदान और हाल में की गई निकासी (withdrawal) की जानकारी मिल जाती है। इससे बार-बार अलग-अलग पोर्टल पर लॉग-इन करने की जरूरत खत्म हो जाती है और काम ज्यादा तेज और आसान हो जाता है।

Passbook Lite और रेगुलर पासबुक में क्या फर्क है?

रेगुलर PF पासबुक में हर महीने का योगदान, ब्याज की एंट्री और सभी ट्रांजैक्शन की पूरी जानकारी होती है। वहीं Passbook Lite सिर्फ जरूरी जानकारी जल्दी देखने के लिए बनाया गया है।

इसमें आप:

  • कुल PF बैलेंस
  • योगदान की समरी
  • आखिरी निकासी की जानकारी आसानी से देख सकते हैं।

जिन सदस्यों को पूरी डिटेल या ग्राफ के जरिए जानकारी चाहिए, वे पहले की तरह डिटेल्ड पासबुक का इस्तेमाल कर सकते हैं। Passbook Lite उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है, जो जल्दी से अपना PF बैलेंस चेक करना चाहते हैं।

सरकार का डिजिटल फोकस

Passbook Lite की शुरुआत सरकार के डिजिटल सरलीकरण के प्रयासों का हिस्सा है। अब मेंबर पोर्टल से Annexure K डाउनलोड करना भी आसान कर दिया गया है, जिससे नौकरी बदलते समय PF ट्रांसफर की स्थिति ट्रैक की जा सकती है।

इसके अलावा EPFO ने क्लेम और ट्रांसफर को जल्दी मंजूरी देने के लिए निचले स्तर के अधिकारियों को भी अधिकार दिए हैं। इससे प्रोसेस में देरी कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।