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ELSS फंड में लॉक-इन 3 साल का ही क्यों होता है? 2, 4 या 5 साल क्यों नहीं और Lock-in की जरूरत ही क्यों पड़ती है

निवेशकों के मन में अक्सर एक सवाल जरूर आता है कि ELSS फंड में लॉक-इन पीरियड ठीक 3 साल का ही क्यों होता है? ये 2 साल और 5 साल का भी तो हो सकता था। चलिए आज  इसके पीछे की वजह जानते हैं और यह भी जानते हैं कि आखिर लॉक-इन पीरियड जरूरी ही क्यों है?

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ELSS Mutual Fund: जब भी टैक्स सेविंग इंवेस्टमेंट ऑप्शन की आती है तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम यानी ELSS फंड का नाम जरूर आता है। 

इन फंड्स में निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। लेकिन निवेशकों के मन में अक्सर एक सवाल जरूर आता है कि ELSS फंड में लॉक-इन पीरियड ठीक 3 साल का ही क्यों होता है? ये 2 साल और 5 साल का भी तो हो सकता था। चलिए आज  इसके पीछे की वजह जानते हैं और यह भी जानते हैं कि आखिर लॉक-इन पीरियड जरूरी ही क्यों है?

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3 साल का लॉक-इन ही क्यों?

ELSS फंड इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड होते हैं, यानी इनका पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है। शेयर बाजार में रिटर्न शॉर्ट टर्म में काफी उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है। 3 साल का समय ऐसा माना जाता है जिसमें बाजार के उतार-चढ़ाव कुछ हद तक संतुलित हो जाते हैं और निवेशक को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ती है।

अगर लॉक-इन सिर्फ 2 साल का होता, तो बाजार की गिरावट के दौरान निवेशक नुकसान में निकल सकते थे। वहीं 5 साल का लॉक-इन बहुत लंबा माना जाता, जिससे निवेशकों की लिक्विडिटी पर असर पड़ता। 3 साल को टैक्स बेनिफिट और इक्विटी निवेश- दोनों के बीच एक संतुलन के तौर पर चुना गया।

लॉक-इन पीरियड होता ही क्यों है?

लॉक-इन पीरियड का सबसे बड़ा मकसद निवेशकों को अनुशासित बनाना है। टैक्स बचाने के नाम पर अगर लोग कभी भी पैसा निकाल सकें, तो ELSS फंड का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। लॉक-इन यह सुनिश्चित करता है कि निवेशक कम से कम कुछ समय तक बाजार में बने रहें और लॉन्ग टर्म इक्विटी निवेश का फायदा उठा सकें।

इसके अलावा, लॉक-इन से फंड मैनेजर को भी स्थिरता मिलती है। उन्हें यह डर नहीं रहता कि अचानक बड़ी मात्रा में पैसा निकल जाएगा। इससे वे लंबी अवधि की रणनीति के तहत बेहतर कंपनियों में निवेश कर पाते हैं।

अगर लॉक-इन ही न हो तो क्या?

अगर ELSS फंड में कोई लॉक-इन न हो, तो यह एक सामान्य इक्विटी म्यूचुअल फंड जैसा बन जाएगा। लोग टैक्स छूट लेकर तुरंत पैसा निकाल सकते हैं, जिससे सरकार का टैक्स सिस्टम प्रभावित होगा। साथ ही, बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी क्योंकि टैक्स सीजन के आसपास बड़े पैमाने पर पैसा अंदर-बाहर होगा।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

3 साल का लॉक-इन ELSS को टैक्स सेविंग के साथ-साथ वेल्थ क्रिएशन का भी जरिया बनाता है। यह निवेशकों को जल्दबाजी से बचाता है और इक्विटी के लंबे सफर का अनुभव देता है। यही वजह है कि ELSS आज भी टैक्स बचाने वाले विकल्पों में सबसे कम लॉक-इन और सबसे ज्यादा ग्रोथ पोटेंशियल वाला माना जाता है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।