2026 में म्यूचुअल फंड में निवेश कैसे शुरू करें, कहां पैसा लगाएं? राधिका गुप्ता ने बताई सिंपल स्ट्रैटेजी
हाल ही में फाइनेंस क्रिएटर कुशल लोढ़ा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि छोटे अमाउंट से निवेश कैसे शुरू किया जाए और लॉन्ग टर्म के लिए कौन सा विकल्प बेहतर रह सकता है।

ईडलवाइस म्यूचुअल फंड की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ, राधिका गुप्ता (Radhika Gupta) का मानना है कि निवेश की शुरुआत जितनी आसान और सस्ती होगी, उतनी ही असरदार साबित हो सकती है- खासकर उन युवाओं के लिए जो 2026 में अपनी निवेश यात्रा शुरू कर रहे हैं।
हाल ही में फाइनेंस क्रिएटर कुशल लोढ़ा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि छोटे अमाउंट से निवेश कैसे शुरू किया जाए और लॉन्ग टर्म के लिए कौन सा विकल्प बेहतर रह सकता है।
राधिका गुप्ता ने कहा कि पहली नौकरी पाने वाले युवा अक्सर जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले 1,000 रुपये को समझते हैं।
उनके मुताबिक, निवेश छोटा होना चाहिए और समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ना चाहिए। कन्फ्यूजन से बचने के लिए उन्होंने निवेशकों को दो कैटेगरी में बांटा- एग्रेसिव और कंजरवेटिव या मॉडरेट।
जो लोग इक्विटी रिस्क लेने को तैयार हैं, उनके लिए गुप्ता की सलाह साफ है। उन्होंने कहा कि अगर आप एग्रेसिव हैं, तो एक सिंपल समाधान चुनिए- लार्ज और मिडकैप 250 इंडेक्स फंड में निवेश करें। उनका मानना है कि अगर कोई निवेशक 15 साल तक इसमें लगातार निवेश करता है, तो अच्छी वेल्थ बनाई जा सकती है।
उन्होंने इस रणनीति की तुलना दाल-चावल से की। जैसे दाल-चावल भरोसेमंद और पेट भरने के लिए काफी होते हैं, वैसे ही एक ब्रॉड मार्केट इंडेक्स फंड निवेश की मजबूत नींव बन सकता है। बाद में चाहें तो थीमैटिक या दूसरे फंड जोड़े जा सकते हैं।
करीब 6 लाख रुपये सालाना कमाने वाले व्यक्ति के लिए उन्होंने हर महीने 10,000 रुपये की SIP को एक सही शुरुआत बताया। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह पैसिव निवेश है, जिसमें फंड मैनेजर शेयर चुनने की कोशिश नहीं करता, बल्कि पूरा बाजार जैसा है वैसा ही फॉलो करता है। अगर भारतीय अर्थव्यवस्था बढ़ती है, तो निवेशक को उसका फायदा अपने आप मिलता है।
मॉडरेट या सतर्क निवेशकों के लिए गुप्ता ने इक्विटी और डेट के संतुलन की सलाह दी। इसके लिए हाइब्रिड म्यूचुअल फंड एक आसान और टैक्स के लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जोखिम सब या कुछ नहीं होता। जैसे तैरना सीखते वक्त कोई सीधे गहरे पानी में नहीं कूदता, वैसे ही निवेशक भी धीरे-धीरे रिस्क बढ़ा सकते हैं।

