जॉब स्विच करने वालों के लिए क्यो होनी चाहिए म्यूचुअल फंड स्ट्रैटजी? ये रणनीति कर सकती है आपकी मदद
जॉब स्विच के समय सैलरी स्ट्रक्चर, कैश फ्लो और खर्चों में बदलाव आता है, ऐसे में म्यूचुअल फंड रणनीति को दोबारा देखना जरूरी हो जाता है। आज हम आपको इस आर्टिकल में उन रणनीतियों के बारे में बताएंगे जिन्हें आप जॉब स्विच करने के वक्त अपना सकते हैं।

Mutual Fund Strategy: नौकरी बदलना करियर का अहम फैसला होता है, लेकिन इसी बदलाव के दौरान निवेश से जुड़ी छोटी-छोटी गलतियां लंबे समय में बड़ा नुकसान कर सकती हैं। जॉब स्विच के समय सैलरी स्ट्रक्चर, कैश फ्लो और खर्चों में बदलाव आता है, ऐसे में म्यूचुअल फंड रणनीति को दोबारा देखना जरूरी हो जाता है।
आज हम आपको इस आर्टिकल में उन रणनीतियों के बारे में बताएंगे जिन्हें आप जॉब स्विच करने के वक्त अपना सकते हैं।
SIP का रिव्यू करें
नई नौकरी में सैलरी बढ़ने या घटने- दोनों स्थितियां संभव हैं। अगर सैलरी बढ़ी है तो SIP को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। वहीं अगर शुरुआती महीनों में खर्च ज्यादा हैं, तो SIP बंद करने के बजाए इसे अस्थायी रूप से कम करना या रोकना बेहतर ऑप्शन हो सकता है।
एसेट एलोकेशन पर ध्यान दें
जॉब स्विच करने के दौरान जोखिम लेने की क्षमता बदल सकती है। अगर नए जॉब रोल में प्रोबेशन या अनिश्चितता है, तो इक्विटी का रेश्यो थोड़ा कम और डेट फंड का हिस्सा थोड़ा बढ़ाया जा सकता है। एक बार जब स्थिरता आ जाए तो फिर से इक्विटी की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सकती है।
पुराने निवेश को छेड़ने से बचे
कई लोग जॉब बदलते ही अपने पुराने म्यूचुअल फंड बंद कर देते हैं, जो अक्सर गलत फैसला होता है। अगर फंड का उद्देश्य, टाइम हॉराइजन और परफॉर्मेंस अब भी आपके लक्ष्य से मेल खाता है, तो उसे जारी रखना बेहतर होता है।
टैक्स प्लानिंग को नजरअंदाज न करें
जॉब स्विच के साल में टैक्स कैलकुलेशन थोड़ा कठिन हो सकता है। ऐसे में ELSS जैसे टैक्स-सेविंग फंड में निवेश को साल के आखिरी महीनों के लिए टालने के बजाय समय से प्लान करना फायदेमंद रहता है।

