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सोना-चांदी की तेजी में काम आए मल्टी एसेट एलोकेशन फंड, निवेशकों को दिया 22% से ज्यादा का रिटर्न

बाजार के जानकार और म्यूचुअल फंड सलाहकार मानते हैं कि सोना और चांदी दोनों को पोर्टफोलियो में जगह मिलनी चाहिए। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि खासकर चांदी में हाल के हफ्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई मौकों पर एक ही दिन में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। ऐसे माहौल में सीधे कमोडिटी में निवेश करने से पहले सही सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

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सोने और चांदी की कीमतें हर हफ्ते नया रिकॉर्ड बना रही हैं। 2025 में सोने ने 60 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है, जबकि चांदी की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। इसके बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कई निवेशक इस तेजी का फायदा नहीं उठा पाए। इसी वजह से अब निवेशकों का फोकस मल्टी एसेट एलोकेशन की ओर बढ़ता दिख रहा है, जहां एक ही फंड के जरिए अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश किया जा सकता है।

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बाजार के जानकार और म्यूचुअल फंड सलाहकार मानते हैं कि सोना और चांदी दोनों को पोर्टफोलियो में जगह मिलनी चाहिए। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि खासकर चांदी में हाल के हफ्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई मौकों पर एक ही दिन में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। ऐसे माहौल में सीधे कमोडिटी में निवेश करने से पहले सही सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

यहीं पर मल्टी एसेट एलोकेशन फंड निवेशकों के लिए काम के साबित हो रहे हैं। ये फंड सोना, चांदी, इक्विटी और डेट जैसे एसेट्स में संतुलित निवेश करते हैं और जोखिम को फैलाते हैं। बीते कुछ सालों में इन फंड्स ने स्थिर और बेहतर रिटर्न दिए हैं।

पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड का मल्टी एसेट एलोकेशन फंड पिछले तीन साल में 22.71 फीसदी और 2025 में 22.30 फीसदी का रिटर्न देकर सबसे आगे रहा है।

यूटीआई म्यूचुअल फंड के मल्टी एसेट एलोकेशन फंड ने इसी अवधि में 12.75 फीसदी और 22.35 फीसदी का रिटर्न दिया। वहीं एचडीएफसी म्यूचुअल फंड का मल्टी एसेट एलोकेशन फंड पिछले तीन साल में 15.20 फीसदी और एक साल में 16.54 फीसदी का रिटर्न देने में सफल रहा।

इन फंड्स की सबसे बड़ी खासियत डायवर्सिफिकेशन है। निवेश अलग-अलग एसेट क्लास में बंटा होने से किसी एक एसेट के खराब प्रदर्शन का असर पूरे पोर्टफोलियो पर नहीं पड़ता। साथ ही इक्विटी जैसे जोखिम वाले निवेश को डेट जैसे सुरक्षित विकल्पों के साथ संतुलित किया जाता है, जिससे अस्थिरता कम होती है और गिरावट के दौर में पूंजी को सहारा मिलता है।

निवेशकों के लिए यह भी राहत की बात है कि एक ही फंड के जरिए कई एसेट क्लास में निवेश हो जाता है। इससे अलग-अलग निवेश संभालने की झंझट कम होती है और टैक्स के लिहाज से भी यह ज्यादा कारगर साबित हो सकता है।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।