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Hardeep Singh Puri: पेट्रोलियम मंत्री ने तेल उत्पादक देशों को क्यों लगाई फटकार?

मौजूदा समय में सऊदी अरब और रूस ने कच्चे तेल के प्रोडक्शन कट को दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। जिसकी वजह से इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं। वहीं दूसरी ओर रूसी तेल भी भारत को 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब मिल रहा है।

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भारतीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ओपेक सचिव जनरल हैथम अल घैस के साथ बैठक की
भारतीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ओपेक सचिव जनरल हैथम अल घैस के साथ बैठक की

ये नया भारत है, जो सही को सही और गलत को गलत बोलने की हिम्मत रखता है। चाहे सामने दुनिया का कोई भी देश क्यों न हो। एक बार फिर भारत ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसकी हिम्मत इतने सालों में अमेरिका तक भी नहीं पाया। इस बार भारत ने गल्फ कंट्रीज को आड़े हाथों लिया है। जी हां, ऐसे देश जो दुनिया के तेल बाजार के सरताज हैं। इन ऑयल प्रड्यूसर्स यानि सऊदी अरब से लेकर ईरान जैसे देशों को भारत ने आइना दिखाया है। तो चलिए जानते हैं मामला है क्या?

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खाड़ी देशों को खरी-खरी सुनाने की वजह जानने के लिए आपको पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri के ट्वीट्स को गौर से समझना होगा। दरअसल एक उद्योग सम्मेलन में भाग लेने के लिए Abu Dhabi में भारतीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ओपेक सचिव General Haitham Al Ghais के साथ बैठक की। इस बैठक के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने Covid के वो खौफनाक दिन याद दिला दिए। उन्होंने लिखा कि कोरोना के दौरान क्रूड ऑयल की कीमत क्रैश हो गई थी। ऐसे वक्त में दुनिया के देश एक साथ आए और तेल प्रड्यूसर देशों के लिए कीमतों को स्थिर किया ताकि उनकों भारी नुकसान न हो सके। लेकिन मौजूदा वक्त में पूरी दुनिया मंदी की गिरफ्त के बेहद करीब है। ऐसे समय पर तेल उत्पादकों को उन देशों के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए जो सिर्फ कच्चे तेल के इंपोर्ट पर निर्भर हैं। लेकिन भारत को खाड़ी देशों पर इस तरह का बयान क्यों देना पड़ा। इसके लिए आपको मौजूदा स्थिति समझनी होगी। World Bank की भारत पर रिपोर्ट आई है। जिसमें कहा गया है कि भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता महंगाई है। वित्त वर्ष 2024 में महंगाई भारत को परेशान कर सकती है। वर्ल्ड बैंक ने अपने महंगाई अनुमान को बढ़ाते हुए 5.2% से 5.9% कर दिया है। रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि भारत में महंगाई के बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में से कच्चे तेल की कीमतें हैं। जैसा कि हम देख भी रहे है कि क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी हुई है और ये बात सबको पता है कि भारत अपनी जरुरत का 80% से ज्यादा तेल इंपोर्ट करता है। 

ऐसे हालात बने क्यों ये भी जान लीजिए। मौजूदा समय में सऊदी अरब और रूस ने कच्चे तेल के प्रोडक्शन कट को दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। जिसकी वजह से इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए हैं। वहीं दूसरी ओर रूसी तेल भी भारत को 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब मिल रहा है। जोकि जी7 और यूरोप की ओर से रूसी तेल पर लगाए गए 60 डॉलर कैप से भी 20 डॉलर ज्यादा है। इसी के चलते भारत ने ओपेक और उसके सहयोगियों देशों को कोविड की याद दिलाई और ऑयल इंपोर्टर के प्रति संवेदनशीलता अपनाने के लिए कहा।

मौजूदा समय में सऊदी अरब और रूस ने कच्चे तेल के प्रोडक्शन कट को दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है
मौजूदा समय में सऊदी अरब और रूस ने कच्चे तेल के प्रोडक्शन कट को दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है

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