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Budget 2026: GST राहत के बाद इंश्योरेंस सेक्टर को आगामी बजट से ये हैं उम्मीदें

GST 2.0 में सरकार द्वारा इंश्योरेंस पर लगने वाले प्रीमियम पर जीएसटी को खत्म करने के बाद अब आगामी बजट 2026 से भी इंश्योरेंस सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं।

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Union Budget 2026: GST 2.0 में सरकार द्वारा इंश्योरेंस पर लगने वाले प्रीमियम पर जीएसटी को खत्म करने के बाद अब आगामी बजट 2026 से भी इंश्योरेंस सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं।

द हेल्दी इंडियन प्रोजेक्ट की जनरल मैनेजर अंकिता श्रीवास्तव और  बीडीओ इंडिया के डील एडवाइजरी समीर शेठ ने आगामी बजट से इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़े अपनी उम्मीदों को बताया है।

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द हेल्दी इंडियन प्रोजेक्ट की जनरल मैनेजर अंकिता श्रीवास्तव ने कहा कि GST छूट में हालिया बदलावों के बाद भारतीय लोगों में बीमा की अहमियत को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अब जैसे-जैसे यूनियन बजट नजदीक आ रहा है, इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़े हितधारक सरकार से केवल प्रतीकात्मक फैसलों की नहीं, बल्कि गहरे और संरचनात्मक सुधारों की उम्मीद कर रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे सुधार होने चाहिए, जो बीमा कवरेज को बढ़ाएं, प्रीमियम को आम लोगों के लिए किफायती बनाएं और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को मजबूत करें। इसमें जोखिम सुरक्षा पर टैक्स इंसेंटिव, माइक्रो-इंश्योरेंस को बढ़ावा, डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में सुधार, उपभोक्ता शिकायतों में कमी और लंबे समय से लंबित सुधारों जैसे कंपोजिट लाइसेंसिंग पर स्पष्ट नीति जैसे कदम अहम माने जा रहे हैं, ताकि सेक्टर की ग्रोथ को आगे भी गति मिलती रहे।

बीडीओ इंडिया के डील एडवाइजरी समीर शेठ ने कहा कि  बजट 2026 से उम्मीद की जा रही है कि हेल्थ इंश्योरेंस की चर्चा सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने तक सीमित न रहकर प्रिवेंटिव और आउटपेशेंट हेल्थकेयर पर केंद्रित होगी। भारत में कुल हेल्थकेयर खर्च का 45% से अधिक हिस्सा लोगों की जेब से होने वाले खर्च का है, ऐसे में बीमा कंपनियां प्रिवेंटिव कवरेज बढ़ाने के लिए सरकार के नीतिगत समर्थन की उम्मीद कर रही हैं। माना जा रहा है कि वेलनेस आधारित इंसेंटिव इंश्योरेंस प्लान लंबे समय में क्लेम के दबाव को कम करने और लोगों के स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इससे न सिर्फ क्लेम में उतार-चढ़ाव कम होगा, बल्कि रिस्क प्राइसिंग बेहतर होगी और कुल मिलाकर हेल्थकेयर सिस्टम पर बोझ भी घटेगा।