
नए संसद भवन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला संबोधन, कहां 25 साल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाना हैं, भारत एक नई दिशा की ओर
आज यानी 28 मई 2023 को भारत को नया संसद भवन मिल चुका है। नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन से अपना पहला संबोधन किया। पीएम ने संबोधन करते हुए कहां है कि हर देश के विकास यात्रा में कुछ पल ऐसे आते हैं जो हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। कुछ तारीखे समय के ललाट पर इतिहास का अमिट हस्ताक्षर बन जाती है, और आज पूरे भारतवर्ष के लिए एक शुभ अवसर है।

आज यानी 28 मई 2023 को भारत को नया संसद भवन मिल चुका है। नए संसद भवन का उद्घाटन PM Narendra Modi ने किया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लोकसभा स्पीकर Om Birla, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री सहित कई नेता मंत्री इस कार्यक्रम के दौरान मौजूद थे। पूरी विधि विधान के साथ पूजा अर्चना के बाद लोकसभा के आसन के पास भारत के इतिहास को दर्शाने वाला, भारतीय कला संस्कृति का प्रतिक कहे जाने वाले सेंगोल को स्थापित किया गया है। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन के उद्घाटन के शीलापट का अनावरण किया। फिर नए संसद के निर्माण में योगदान करने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन से अपना पहला संबोधन किया। पीएम ने संबोधन करते हुए कहां है कि हर देश के विकास यात्रा में कुछ पल ऐसे आते हैं जो हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। कुछ तारीखे समय के ललाट पर इतिहास का अमिट हस्ताक्षर बन जाती है, और आज पूरे भारतवर्ष के लिए एक शुभ अवसर है। नरेंद्र मोदी ने आगे यह भी कहा है कि हमारे पास 25 वर्ष का अमृत कालखंड है। इन 25 वर्षों में हमें मिलकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है।
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आज नए संसद भवन को देखकर हर भारतीय गौरव से भरा हुआ है। इसमें वास्तु, विरासत, कला, कौशल, संस्कृति और सविंधान भी है। लोकसभा का आंतरिक हिस्सा राष्ट्रीय पक्षी मोर पर आधारित है, राज्यसभा का आंतरिक हिस्सा राष्ट्रीय फूल कमल पर आधारित है। संसद के प्रांगण में राष्ट्रीय वृक्ष बरगद भी है। गुलामी के बाद हमारा भारत ने बहुत कुछ खोकर अपनी नई यात्रा शुरू की थी। वो यात्रा कितने ही उतार-चढ़ावों से होते हुए, कितनी ही चुनौतियों को पार करते हुए आजादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुकी है। आजादी का यह अमृतकाल विरासत को सहेजते हुए, विकास को नए आयाम गढ़ने का अमृतकाल है। भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है, मदर ऑफ डिमॉक्रेसी भी है।

भारत आज वैश्विक लोकतंत्र का भी बहुत बड़ा आधार है। लोकतंत्र हमारे लिए सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, एक संस्कार है, एक विचार है, एक परंपरा है। आज इस ऐतिहासिक अवसर पर कुछ देर पहले संसद की नई इमारत में पवित्र सेंगोल की भी स्थापना हुई है। महान चोल साम्राज्य में सेंगोल को कर्तव्य पथ का, सेवा पथ का, राष्ट्र पथ का प्रतीक माना जाता था। राजा जी और अधिनम के संतों के मार्ग दर्शन में यही सेंगोल सत्ता के हस्तातंरण का प्रतीक बना था। TamilNadu से विशेष तौर पर अधिनम के संत भवन में हमें आशीर्वाद देने के लिए उपस्थित हुए थे। यह नया भवन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपने को साकार करने का साधन बनेगा। यह नया भवन आत्मनिर्भर भारत के सूर्योदय का साक्षी बनेगा। यह नया भवन विकसित भारत के संकल्पों की सिद्धी होते हुए देखेगा। नए रास्तों पर चलकर ही नए प्रतिमान गढ़े जाते हैं। आज नया भारत नए लक्ष्य तय कर रहा है। नया जोश है, नई उमंग है, दिशा नई है, दृष्टि नई है। पीएम मोदी ने कहा, 'मैं सभी देशवासियों को भारतीय लोकतंत्र के इस स्वर्णिम क्षण की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। ये सिर्फ एक भवन नहीं है। ये 140 करोड़ भारतवासियों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है। ये विश्व को भारत के दृढ संकल्प का संदेश देता हमारे लोकतंत्र का मंदिर है।'
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