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G20 summit में ताजमहल के बजाय कोणार्क का सूर्य मंदिर

कोणार्क स्थित सूर्य मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में राजा नरसिम्हादेव-प्रथम ने करवाया था। सन् 1948 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है। बताते चलें कि भारतीय सांस्कृति में इसके महत्व को दर्शाने के लिए 10 रुपये के भारतीय नोट के पीछे कोणार्क सूर्य मंदिर को दर्शाया गया है।

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G20 summit में ताजमहल के बजाय कोणार्क का सूर्य मंदिर
G20 summit में ताजमहल के बजाय कोणार्क का सूर्य मंदिर

G20 Summit में हिस्सा लेने आए विश्व के तमाम बड़े नेता का प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारत मंडपम में स्वागत किया। जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के अलग अलग नेताओं से हाथ मिलाकर उनका स्वागत कर रहे थे, उस वक़्त पूरे देश की निगाहें जिस चीज पर रुकीं वो ओड़िशा के विश्व प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर का चक्र था। इंटरनेट पर जो तस्वीरें और वीडियो आए हैं, उनमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति Jo Baiden को कोणार्क सूर्य मंदिर का ऐतिहासिक सांस्कृतिक महत्व समझाते हुए देखा जा सकता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुमार देश के उन नेताओं में है, जो अक्सर ही हटकर काम करते हैं,और ऐसा बहुत कुछ कर देते हैं जो सुर्ख़ियों में अपने आप ही आ जाता है। जी 20 समिट में कोणार्क सूर्य मंदिर के चक्र को दिखाने का मामला भी कुछ ऐसा ही है। ध्यान रहे पूर्व में ऐसे तमाम मौके आए हैं जब किसी पर्यटन स्थल की ब्रांडिंग के नाम पर हमारे नेता ताजमहल को पेश करते थे। कोणार्क सूर्य मंदिर के चक्र को भारत की एक बड़ी सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है। भारत मंडपम में लगा कोणार्क चक्र भारत के प्राचीन ज्ञान, उन्नत सभ्यता और वास्तुशिल्प की उत्कृष्टता का प्रतीक तो है ही। साथ ही यह लोकतंत्र के पहिये के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में कार्य करता है जो लोकतांत्रिक आदर्शों के लचीलेपन और समाज में प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति Jo Baiden को कोणार्क सूर्य मंदिर का ऐतिहासिक सांस्कृतिक महत्व समझाते हुए देखा जा सकता है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति Jo Baiden को कोणार्क सूर्य मंदिर का ऐतिहासिक सांस्कृतिक महत्व समझाते हुए देखा जा

कोणार्क स्थित सूर्य मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में राजा नरसिम्हादेव-प्रथम ने करवाया था। सन् 1948 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी है। बताते चलें कि भारतीय सांस्कृति में इसके महत्व को दर्शाने के लिए 10 रुपये के भारतीय नोट के पीछे कोणार्क सूर्य मंदिर को दर्शाया गया है। बहरहाल, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वाभाव है। इस बात में कोई शक नहीं है कि इस पहल के बाद ओड़िशा और वहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं जिस तरह प्रधानमंत्री पर एक वर्ग द्वारा सोशल मीडिया पर ये आरोप लगाया जा रहा है कि, अपनी इस रणनीति से उन्होंने ताजमहल को नजरअंदाज किया, तो ऐसे लोगों से हम भी इतना जरूर कहेंगे कि भारत का अर्थ केवल ताजमहल नहीं है। तमाम धरोहरें ऐसी हैं जिन्हें मौका दिया जाना चाहिए और कोणार्क के चक्र को भारत मंडपम तक लाना इसी कड़ी का हिस्सा है।

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