
दुनिया को Lithium-Ion Battery देने वाले John Goodenough नहीं रहे, 2019 में मिला था नोबेल पुरस्कार
लीथियम-आयन बैटरी को दुनिया में पेश करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता जॉन बी गुडएनफ का निधन हो गया है। वे 100 वर्ष के थे। टेक्सास के ऑस्टिन में रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। Texas University ने उनके निधन की जानकारी दी। गुडएनफ वहीं इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। ट्विटर पर कई दिग्गज उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। बेंचमार्क मिनरल इंटेलीजेंस के CEO सिमोन मूरेज (Simon Moores) ने भी ट्वीट कर शोक जताया है। लीथियम-आयन बैटरी बनाने वाले जॉन को रिचार्जेबल पावर सोर्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 2019 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

Lithium-Ion Battery को दुनिया में पेश करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता John B Goodenough का निधन हो गया है। वे 100 वर्ष के थे। टेक्सास के ऑस्टिन में रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। Texas University ने उनके निधन की जानकारी दी। गुडएनफ वहीं इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे। ट्विटर पर कई दिग्गज उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। बेंचमार्क मिनरल इंटेलीजेंस के CEO सिमोन मूरेज (Simon Moores) ने भी ट्वीट कर शोक जताया है।
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लीथियम-आयन बैटरी बनाने वाले जॉन को रिचार्जेबल पावर सोर्स के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 2019 में रसायन विज्ञान का Nobel Prize दिया गया था। ये स्रोत मोबाइल, लैपटॉप से लेकर अधिकांश आधुनिक पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होता है। नोबेल पुरस्कार मिलने से पहले जॉन गुडएनफ को वैज्ञानिक, अकादमिक हलकों और कॉर्पोरेट दिग्गजों के बाहर बहुत कम लोग जानते थे। नोबेल विजेता होने के बाद पूरी दुनिया उन्हें जान गई। बैटरी और सोलर सेल रिसर्चर Prof Saiful Islam ने भी उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में उन्होंने ऐसे प्रयोग किए, जिससे 1980 में स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट कंप्यूटर के विकास की राह आसान हुई। उनकी बनाई लिथियम-आयन बैटरी ही है, जो इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों को भी पावर देती है। इन्हीं बैटरियों का इस्तेमाल टेस्ला जैसी कंपनियों ने किया। इसके अलावा, उनकी बैटरियों का इस्तेमाल कार्डियक डिफाइब्रिलेटर जैसे जीवनरक्षक चिकित्सा उपकरणों में भी किया गया है। उनके निधन से अकादमिक और वैज्ञानिक जगत में शोक की लहर है।

