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हर दिन 100 फ्लाइट्स घटाएगी एअर इंडिया! इन रूट्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर - ऐसा क्या हुआ?

टाटा ग्रुप की एयरलाइन 'एयर इंडिया' जून से अपने फ्लाइट ऑपरेशंस में बड़ी कटौती कर सकती है। आसमान छूती तेल की कीमतों ने एयरलाइन को यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। किन रूट्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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AI Generated Image

Air India News: तेजी से बढ़ती जेट फ्यूल (ATF) कीमतों के बीच टाटा ग्रुप की एयरलाइन कंपनी, एयर इंडिया (Air India) ने बड़ा फैसला लिया है। एयरलाइन अगले महीने जून 2026 से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मिलाकर रोज करीब 100 उड़ानें घटा सकती है। फिलहाल एयरलाइन रोज करीब 1100 उड़ानें ऑपरेट करती है, लेकिन लागत बढ़ने से ऑपरेशन समेटने पड़ रहे हैं।

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इन रूट्स पर पड़ सकता है असर

अगर एयर इंडिया उड़ानें कम करती है तो इसका सबसे ज्यादा असर यूरोप, नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर रूट्स पर दिखेगा, जहां कटौती सबसे ज्यादा होगी। इंडस्ट्री को अब शुक्रवार को होने वाले जेट फ्यूल रिविजन का इंतजार है, जिससे संकट और गहरा सकता है।

एयरलाइन क्यों उठा सकती है ये कदम

एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की कमर तोड़ दी है। आज 1 मई को एक बार फिर से ATF की कीमतें 5% बढ़ी है। यह लगातार दूसरा महीना है जब कीमतें बढ़ी हैं। दिल्ली में ATF की कीमत 76.55 डॉलर प्रति किलोलीटर बढ़ी है जिसके बाद अब ATF की कीमत 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर पहुंच गई है।

हालांकि, सरकार ने घरेलू एयरलाइंस को आंशिक राहत दी है। पिछले महीने की बड़ी बढ़ोतरी में केवल 25% बोझ ही भारतीय कंपनियों पर डाला गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस पर पूरा असर पड़ा।

इंडस्ट्री ने जताई चिंता

इस फैसले से पहले Federation of Indian Airlines ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी। संगठन, जिसमें IndiGo समेत अन्य कंपनियां शामिल हैं, ने कहा कि बढ़ती लागत के कारण इंडस्ट्री 'बेहद दबाव में' है और ऑपरेशन बंद करने की कगार पर पहुंच सकती है। एयरलाइंस का कहना है कि ऊंचे फ्यूल दाम के कारण कई रूट्स पर उड़ानें अब प्रॉफिटैबिलिटी नहीं रह गई हैं।

एयर इंडिया पर ज्यादा असर क्यों?

जहां IndiGo घरेलू बाजार में मजबूत है, वहीं Air India का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बड़ा है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर बढ़ी फ्यूल लागत का असर उस पर ज्यादा पड़ रहा है।

ग्लोबल स्तर पर भी एयरलाइंस इसी दबाव से जूझ रही हैं। बढ़ती लागत और घटते मार्जिन के कारण कंपनियां अब नेटवर्क घटाने और ऑपरेशन सीमित करने जैसे कदम उठा रही हैं।