ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन का बड़ा झटका! Saudi Aramco ने संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद बंद की रास तनुरा रिफाइनरी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद रास तनुरा रिफाइनरी को बंद कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब तेहरान ने अमेरिका-इज़राइल के हमलों के जवाब में पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए।

पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव अब तेल आपूर्ति पर सीधा असर डालने लगा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने संदिग्ध ड्रोन हमले के बाद रास तनुरा रिफाइनरी को बंद कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब तेहरान ने अमेरिका-इज़राइल के हमलों के जवाब में पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह ड्रोन अटैक ईरान ने किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ईरान द्वारा किए गए इस अटैक का एक वीडियो वायरल हो रहा है हालांकि बिजनेस टुडे बाजार इस वीडियो की पुष्टी नहीं करता है।
5.5 लाख बैरल रोज क्षमता पर ब्रेक
सऊदी अरब के खाड़ी तट पर स्थित रास तनुरा कॉम्प्लेक्स मध्य-पूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में गिना जाता है। इसकी क्षमता करीब 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है। यही नहीं, यह सऊदी कच्चे तेल का अहम निर्यात टर्मिनल भी है। ऐसे में इसका बंद होना सिर्फ सऊदी उत्पादन नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन के लिए भी बड़ा झटका है।
खाड़ी के बड़े शहर भी निशाने पर
तनाव सिर्फ सऊदी तक सीमित नहीं रहा। ड्रोन हमलों ने अबू धाबी, दुबई, दोहा, मनामा और ओमान के व्यावसायिक बंदरगाह दूक्म को भी निशाना बनाया है। संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के प्रमुख शिपिंग हब लगभग ठप हो गए हैं। इससे दुनिया के सबसे रणनीतिक ऊर्जा कॉरिडोर में तेल और गैस की आवाजाही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ब्रेंट क्रूड 13% उछला
तेल बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स सोमवार को करीब 13 फीसदी चढ़ गए। ट्रेडर्स को डर है कि अगर हमले लंबे चले तो उत्पादन और निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति की धुरी है, इसलिए हर व्यवधान का असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर दिखता है।
2019 की याद ताजा
सितंबर 2019 में भी अबकैक और खुरैस प्लांट पर अभूतपूर्व ड्रोन और मिसाइल हमले हुए थे। तब सऊदी उत्पादन का आधे से ज्यादा हिस्सा अस्थायी रूप से ठप हो गया था। उस घटना ने दिखाया था कि कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद अहम ऊर्जा ढांचा कितना संवेदनशील है। ताजा हमला उसी तरह की आशंकाएं फिर जगा रहा है।

