Iran War Impact: ईरान तनाव से भारतीय चावल निर्यात प्रभावित! पेमेंट में भी देरी
28 फरवरी को हुए ईरान पर हमले के बाद से ही मिडिल ईस्ट और दुनिया में इसका प्रभाव महसूस होने लगा है। इजरायल और अमेरिका के जॉइंट ऑपरेशन के बाद ईरान ने भी जमकर मिसाइल अटैक्स किए हैं। अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की भी मौत हो गई है, जिससे ईरान समेत पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है।

ईरान समेत मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के निर्यात पर भी दिखने लगा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद अब भारत से ईरान और अफगानिस्तान जाने वाले चावल की शिपमेंट अटक गई है और साथ ही इनका पेमेंट भी रुक गया है।
28 फरवरी को हुए ईरान पर हमले के बाद से ही मिडिल ईस्ट और दुनिया में इसका प्रभाव महसूस होने लगा है। इजरायल और अमेरिका के जॉइंट ऑपरेशन के बाद ईरान ने भी जमकर मिसाइल अटैक्स किए हैं। अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की भी मौत हो गई है, जिससे ईरान समेत पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है।
चावल निर्यातकों की बढ़ी टेंशन
न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका द्वारा की गई सैन्य हमले के बाद से ही हरियाणा के चावल एक्सपोर्टर्स को कई परेशानियां हो रही है।
ईरान और अफगानिस्तान को निर्यात किए जाने वाली चावल की शिपमेंट अटक गई है और साथ ही उन्हें पेमेंट मिलने में भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (Rice Exporters Association) के स्टेट यूनिट प्रेसिडेंट सुशील कुमार जैन ने कहा है कि इस जंग का असर अब चावल के व्यापार पर दिखने लगा है। इस जंग के चलते जो भी शिपमेंट ईरान या फिर ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट के रास्ते अफगानिस्तान जा रहे थे वो अटक गए हैं।
उनके अनुसार जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, शिपमेंट इसी तरह फंसी रहेगी और इसका असर मार्केट पर पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने ये भी साफ कर दिया है कि इस पूरे जंग का कितना असर पड़ेगा ये अंदाजा लगाना अभी संभव नहीं है, क्योंकि ये इस बात पर निर्भर होगा कि जंग कितने समय तक चलेगी।
हरियाणा के निर्यातक हैं सबसे अधिक प्रभावित
बासमती चावल के निर्यात को लेकर सुशील कुमार ने कहा कि भारत के चावल निर्यात का कुल 35 फीसद अकेले हरियाणा करता है। करनाल के एक राइस मिलर नीरज कुमार की मानें तो एक दिन के अंदर ही इस जंग का असर व्यापार पर दिखने लगा है। इसके चलते बासमती चावल की कीमतों में लगभग 4 से 5 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है और क्विंटल में यही कीमत 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसा ही असर पिछले साल भी देखा गया था जब जून 2025 में इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष हुआ था।
उन्होंने कहा कि भारत के बासमती एक्सपोर्ट्स में हरियाणा का सबसे बड़ा योगदान है। ईरान हमारे बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीददार है , इसके अलावा मिडिल ईस्ट के अन्य देश जैसे UAE, ओमान, यमन और इराक भी भारत से बासमती चावल खरीदते हैं। अब मिडिल ईस्ट में इस बढ़ते तनाव का असर मार्च महीने की शिपमेंट पर अभी से दिखने लगा है। हरियाणा का करनाल बासमती चावल के निर्यात का मुख्य हब है, वहीं कैथल और सोनीपत भी दूसरे देशों में अपनी शिपमेंट भेजते हैं।
निर्यातकों की बढ़ी चिंताएं
इस सैन्य संघर्ष के अलावा निर्यातकों को कई तरह की नई चिंताएं भी हैं। एक्सपोर्टर्स को युद्ध के दौरान जहाजों के इंश्योरेंस को लेकर भी परेशानी है, इससे उनका रिस्क बढ़ जाता है। सऊदी अरब के बाद, ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा बासमती चावल मार्केट है।
भारत ने वर्ष 2024 से 2025 के दौरान ईरान को लगभग 1 मिलियन टन खुशबूदार अनाज एक्सपोर्ट किया था। इस दौरान करीब 6 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया गया था जिसकी मुख्य डिमांड मिडिल ईस्ट और वेस्ट एशिया के बाजारों से आई थी। इसके अलावा इराक, UAE और USA भी बासमती चावल के बड़े खरीदार हैं।

