Samay Raina के India's Got Latent 2 पर नजर, वकील बोले क्रिएटिविटी और कानूनी सीमाओं के बीच रखना होगा संतुलन
Samay Raina का शो India's Got Latent 2 एक नए विवाद के बाद फिर चर्चा में है। शो के वकील Lavin Hirani ने बताया कि कानूनी टीम अब कंटेंट की समीक्षा कर रही है। हालांकि उनका कहना है कि उद्देश्य कॉमेडी और क्रिएटिविटी को रोकना नहीं, बल्कि कानूनी सीमाओं और संवेदनशील मुद्दों के बीच संतुलन बनाना है।

In Short
- India's Got Latent 2 के नए एपिसोड पर विवाद के बाद Samay Raina की कानूनी टीम कंटेंट की समीक्षा कर रही है।
- वकील Lavin Hirani ने कहा कि क्रिएटिविटी को खत्म किए बिना कानूनी जोखिमों को समझना जरूरी है।
- AI, डीपफेक और सेलिब्रिटी पर्सनैलिटी राइट्स को उन्होंने आने वाली बड़ी कानूनी चुनौतियां बताया।
कॉमेडियन Samay Raina का शो India's Got Latent 2 एक बार फिर चर्चा में है। पिछले विवाद के बाद अब शो की नई सीरीज के कंटेंट पर कानूनी टीम नजर रख रही है। Samay Raina के वकील Lavin Hirani ने बताया कि टीम का मकसद शो की क्रिएटिविटी को रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कंटेंट कानूनी सीमाओं के भीतर रहे।
हाल ही में शो के एक एपिसोड में Samay Raina और कॉमेडियन Sharon Verma के बीच बिहार और कश्मीर को लेकर हुई बातचीत पर सोशल मीडिया और राजनीतिक स्तर पर प्रतिक्रिया देखने को मिली।

वकील बोले क्रिएटिविटी को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता
Lavin Hirani ने कहा कि बतौर वकील उनकी जिम्मेदारी यह देखना है कि किसी की रचनात्मक स्वतंत्रता पूरी तरह खत्म न हो जाए। उन्होंने कहा कि अगर हर चीज पर आपत्ति जताई जाएगी तो ऐसा शो चलाना मुश्किल हो जाएगा।
उनके मुताबिक, India’s Got Latent जैसे शो की पहचान उसकी अलग शैली और कॉमेडी से है, इसलिए कानूनी समीक्षा का उद्देश्य इसे बदलना नहीं बल्कि संभावित समस्याओं को समझना है।
पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत
इससे पहले Samay Raina और चार अन्य लोगों को दिव्यांग लोगों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी। 14 अगस्त को कोर्ट ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी थी।
वकील Hirani ने बताया कि Cure SMA Foundation की ओर से दायर याचिका का मकसद सिर्फ कॉमेडियंस को सजा दिलाना नहीं था, बल्कि टीवी, फिल्मों और शो में दिव्यांग लोगों को दिखाने के तरीके को लेकर गाइडलाइंस तैयार करना था।
जागरूकता अभियान पर भी रहा फोकस
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद Samay Raina और अन्य लोगों ने जागरूकता और फंड जुटाने से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसमें शतरंज टूर्नामेंट और अन्य पहल शामिल थीं।
Hirani ने कहा कि बाद में फोकस सिर्फ कोर्ट के निर्देश पूरे करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि SMA और दिव्यांग लोगों से जुड़े मुद्दों जैसे पहुंच, मेडिकल खर्च, सम्मान और आत्मसम्मान पर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की गई।
कॉमेडी में सबसे अहम है संदर्भ
नए विवाद को लेकर Hirani ने कहा कि कॉमेडी में सबसे बड़ा सवाल संदर्भ का होता है। उनके अनुसार किसी बात को लेकर हर व्यक्ति की संवेदनशीलता अलग हो सकती है और हर स्थिति के लिए कोई तय कानूनी फॉर्मूला बनाना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविध देश में अलग-अलग विचारधाराओं, धर्मों और भाषाओं के कारण किसी न किसी को आपत्ति हो सकती है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि आपत्ति की गंभीरता कितनी है।
सेलिब्रिटी मामलों में मीडिया ट्रायल की चुनौती
Lavin Hirani ने यह भी कहा कि सेलिब्रिटी से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ सार्वजनिक धारणा भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने बताया कि कई बार मीडिया ट्रायल के कारण स्थिति अलग हो सकती है और मशहूर लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की छवि भी मामलों को देखने के नजरिए को प्रभावित कर सकती है, हालांकि अंतिम फैसला अदालत ही करती है।
AI और डीपफेक भी बड़ी कानूनी चुनौती
Hirani के मुताबिक, आने वाले समय में AI और डीपफेक तकनीक से जुड़े मामले सेलिब्रिटी के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। कई हस्तियां पहले ही अपने नाम, आवाज, तस्वीर और पहचान के गलत इस्तेमाल को लेकर कानूनी कदम उठा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट और AI के दौर में पर्सनैलिटी राइट्स की जरूरत बढ़ गई है, लेकिन यह भी जरूरी है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनावश्यक रोक न लगे।

