पेपर लीक पर सख्त होगा कानून... 10 साल की जेल से 10 करोड़ जुर्माने तक जानें 5 बदलाव
पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों पर अब पहले से ज्यादा कड़ी कार्रवाई की तैयारी है। नए संशोधन विधेयक में जांच और ट्रायल की समयसीमा तय करने के साथ जेल और जुर्माने के प्रावधान सख्त किए गए हैं। जानिए पुराने कानून से अलग वे पांच बदलाव क्या हैं।

In Short
- पेपर लीक मामलों की जांच 2 महीने में पूरी होगी और चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर ट्रायल खत्म करना होगा।
- दोषी पाए जाने पर 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान होगा।
- संगठित गिरोहों को न्यूनतम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
Paper Leak Bill 2026: केंद्र सरकार पेपर लीक और परीक्षाओं में होने वाली नकल को रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने की तैयारी कर रही है। सरकार सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश करने जा रही है।
इस विधेयक में तेज जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट, कड़ी जेल की सजा और भारी जुर्माने जैसे प्रावधान रखे गए हैं। आइए जानते हैं कि नए संशोधन विधेयक में पुराने कानून के मुकाबले कौन से 5 बड़े बदलाव किए जाएंगे।
1) हर राज्य में बनेंगे विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट
प्रस्तावित संशोधन के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जा सकेंगे। किसी भी सेशन कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में अधिसूचित किया जा सकेगा।
इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का प्रावधान रखा गया है। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार किसी मामले की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स भी बना सकेगी।
2) दो महीने में पूरी करनी होगी जांच
पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही उस पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
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संगठित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों के लिए सजा और ज्यादा कड़ी होगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम सात साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।
3) पुराने कानून से कैसे अलग होंगे नियम
अभी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 लागू है। इसमें सामान्य मामलों में तीन से पांच साल तक की जेल का प्रावधान है। संगठित अपराध के मामलों में पांच से 10 साल की सजा और कम से कम एक करोड़ रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है।
नया संशोधन जांच और सुनवाई की समयसीमा तय करने के साथ सजा और जुर्माने को ज्यादा सख्त बनाएगा।
4) परीक्षा केंद्रों के लिए आएंगी नई गाइडलाइंस
विधेयक में परीक्षा केंद्रों के प्री ऑडिट, उम्मीदवारों की बायोमेट्रिक जांच, सुरक्षा व्यवस्था, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया के लिए नए नियम प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा परीक्षा की निगरानी, परीक्षा के बाद की गतिविधियों और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी गाइडलाइंस में शामिल होगी।
5) 15 गतिविधियां मानी जाएंगी अपराध
विधेयक में 15 तरह की गतिविधियों को साफ तौर पर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना, नकली एडमिट कार्ड जारी करना और परीक्षा प्रक्रिया में दूसरी तरह की धोखाधड़ी शामिल है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 जुलाई को इस विधेयक को मंजूरी दी थी। इसे 27 जुलाई को लोकसभा में पेश करने, चर्चा कराने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

