National Education Policy 2020: अब रटने वाली पढ़ाई नहीं, काबिलियत और क्रिएटिविटी पर होगा जोर
National Education Policy 2020: भारत शिक्षा समिट 2025 (Bharat Siksha Summit 2025) में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) पर जोरदार चर्चा हुई।

भारत शिक्षा समिट 2025 (Bharat Siksha Summit 2025) में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) पर जोरदार चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन बालाजी फाउंडेशन (Balaji Foundation) ने किया, जिसमें देश के शिक्षा और राजनीति से जुड़े बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया। इस समिट में शिक्षा के नए बदलावों, उद्योग और अकादमिक जगत के बीच की दूरी कम करने और मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर बातचीत हुई।
मेमोरी बेस्ड पढ़ाई नहीं, क्रिएटिव सोच पर होगा जोर
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (Manoj Sinha) ने अपने भाषण में कहा कि अब केवल रटने वाली पढ़ाई नहीं चलेगी, बल्कि छात्रों में रचनात्मक सोच और तर्कशक्ति विकसित करना जरूरी है। उन्होंने महात्मा गांधी, श्रीनिवास रामानुजन और सचिन तेंदुलकर जैसे लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर हम अपने अंदर की आवाज को सुनें और कड़ी मेहनत करें, तो सफलता जरूर मिलेगी।
मातृभाषा में पढ़ाई से छात्रों को होगा फायदा
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को बढ़ावा देने की बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में पढ़ने से छात्रों की समझने और याद रखने की क्षमता बेहतर होती है, जिससे वे आगे चलकर जॉब के बजाय खुद रोजगार पैदा कर सकते हैं।
विदेश में पढ़ाई का क्रेज, लेकिन देश में भी मिलनी चाहिए बेहतर शिक्षा
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल (Justice Rajesh Bindal) ने एक गंभीर मुद्दे को उठाते हुए बताया कि हर साल भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ाई के लिए जा रहे हैं, जिससे देश से करीब 45 अरब डॉलर बाहर जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें अपने शिक्षा तंत्र को इतना मजबूत बनाना होगा कि छात्र विदेश जाने के बजाय यहीं रहकर उच्च शिक्षा लें और भारत को शिक्षा का ग्लोबल हब बनाया जाए।
छात्रों को मिलेगा अपनी पसंद की पढ़ाई करने का मौका
सांसद नवीन जिंदल (Naveen Jindal) ने कहा कि नई शिक्षा नीति छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार पढ़ाई करने का मौका देगी। उन्होंने कहा कि हमें इस नीति को सही ढंग से लागू करना होगा, ताकि हमारे छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में।
शिक्षकों का विकास जरूरी, तभी शिक्षा में आएगा सुधार
दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. धनंजय जोशी (Prof. Dhananjay Joshi) ने कहा कि जब तक शिक्षकों का विकास नहीं होगा, तब तक शिक्षा में सुधार नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत' (Viksit Bharat) बनाने के लिए हमें शिक्षकों को बेहतर ट्रेनिंग और संसाधन देने होंगे।