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India-US Trade Deal: किसानों और डेयरी सेक्टर से कोई समझौता नहीं, सरकार ने साफ किया रुख- सूत्र

सूत्रों के मुताबिक, एग्रीमेंट में भारत ने साफ कर दिया है कि खेती और डेयरी ऐसे सेक्टर हैं, जहां संरक्षण जारी रहेगा। किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाला कोई भी प्रावधान स्वीकार नहीं किया गया है। सूत्रों ने कहा कि बातचीत के दौरान मुख्य सुरक्षा उपायों पर कोई समझौता नहीं हुआ है।

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India US Trade Deal
India US Trade Deal

India-US Trade Deal: भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित नए ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर सरकार ने साफ किया है कि किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि समझौते की बातचीत के दौरान इन दोनों संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

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सूत्रों के मुताबिक, एग्रीमेंट में भारत ने साफ कर दिया है कि खेती और डेयरी ऐसे सेक्टर हैं, जहां संरक्षण जारी रहेगा। किसानों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर डालने वाला कोई भी प्रावधान स्वीकार नहीं किया गया है। सूत्रों ने कहा कि बातचीत के दौरान मुख्य सुरक्षा उपायों पर कोई समझौता नहीं हुआ है।

टैरिफ में कटौती से एक्सपोर्ट को सहारा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि इस समझौते के तहत भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25 फीसदी से घटकर 18 फीसदी हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। इस घोषणा के बाद भारत उन देशों में शामिल हो गया है, जिन पर ट्रंप प्रशासन ने सबसे कम टैरिफ लगाया है। यह दर पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, वियतनाम और चीन से भी कम है।

ऊर्जा खरीद पर क्या बदलेगा?

ऊर्जा आपूर्ति के सवाल पर सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि भारत अपने फैसले ग्लोबल हालात और प्रतिबंधों के आधार पर करता है। उन्होंने कहा कि जब वेनेजुएला पर प्रतिबंध थे, तब हमने वहां से तेल नहीं खरीदा। अब प्रतिबंध हटे हैं, तो खरीद होगी। इससे संकेत मिलता है कि रणनीतिक ऊर्जा खरीद समझौते का हिस्सा हो सकती है, लेकिन किसी एक देश पर निर्भरता नहीं बढ़ेगी।

500 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है व्यापार

सूत्रों का मानना है कि अगर यह डील अमल में आती है, तो भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार आने वाले वर्षों में 500 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।

अमेरिका की नजर भारत के बाजार पर

अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस ने पहले कहा था कि यह समझौता भारत के 'विशाल बाजार' में अमेरिकी कृषि के निर्यात को बढ़ाएगा और अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में कैश लाएगा। उन्होंने बताया कि 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था, जिसे यह डील कम करने में मदद करेगी।