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BT India @ 100: प्राइवेट स्पेस सेक्टर की नई उड़ान, पवन गोयनका ने बताया भारत कैसे बनेगा ग्लोबल प्लेयर

भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर अब प्रयोग से आगे बढ़कर कारोबार के नए दौर में पहुंच रहा है। IN SPACe के चेयरमैन डॉ पवन गोयनका ने बताया कि लगातार सफल लॉन्च, बढ़ती सरकारी मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार से भारतीय स्पेस कंपनियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।

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भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर अब प्रयोग के दौर से निकलकर कारोबार बढ़ाने की तरफ बढ़ रहा है। IN SPACe के चेयरमैन डॉ पवन गोयनका के मुताबिक, आने वाले समय में लगातार सफल मिशन, बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता और बाजार में मांग तय करेगी कि भारतीय कंपनियां दुनिया में कितनी मजबूत जगह बना पाती हैं।

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BusinessTodayIndia@100 कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ पवन गोयनका ने कहा कि IN SPACe का मकसद स्पेस सेक्टर को सिर्फ सरकार और इसरो तक सीमित रखने के बजाय इसमें प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना है।

एक सफल लॉन्च से नहीं बनेगा कारोबार

स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम वन की प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता के सफल प्रदर्शन को अहम शुरुआत माना गया है। हालांकि गोयनका ने कहा कि केवल एक सफल लॉन्च से लंबे समय तक चलने वाला कारोबार तैयार नहीं हो सकता।

उनके मुताबिक, तीन या चार लॉन्च बिना किसी बड़ी परेशानी के सफल होने से ग्राहकों का टेक्नोलॉजी पर भरोसा काफी बढ़ सकता है। महंगे सैटेलाइट और दूसरे पेलोड भेजने वाले ग्राहकों के लिए भरोसेमंद तकनीक बेहद जरूरी है।

भारत में करीब 450 स्पेस स्टार्टअप

गोयनका ने बताया कि भारत में अब करीब 450 स्पेस स्टार्टअप हैं। इनमें लगभग 20 कंपनियां ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी हैं जहां वे अपने कमर्शियल कारोबार को बड़े स्तर पर ले जा सकती हैं।

ये कंपनियां लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट, इन स्पेस कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और रिफ्यूलिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं।

सरकार को बनना होगा बड़ा ग्राहक

गोयनका ने स्पेस सेक्टर की ग्रोथ के लिए तीन बड़ी जरूरतें बताईं। पहली जरूरत सरकारी मांग की है। डिफेंस, एग्रीकल्चर, अर्बन प्लानिंग और वेदर फोरकास्टिंग जैसे क्षेत्रों में स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना होगा।

उन्होंने बताया कि तैयार किए जा रहे कुल 52 सैटेलाइट में से 31 सैटेलाइट प्राइवेट सेक्टर को दिए जा चुके हैं।

दूसरे उद्योगों में बढ़ाना होगा इस्तेमाल

दूसरी जरूरत स्पेस सेक्टर से बाहर की इंडस्ट्री में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाने की है। माइनिंग, एग्रीकल्चर, फिशरीज और ऑटोमोटिव जैसे सेक्टर अभी जीपीएस के अलावा स्पेस टेक्नोलॉजी का सीमित इस्तेमाल करते हैं।

तीसरी प्राथमिकता अंतरराष्ट्रीय बाजार है। भारत ने 44 अरब डॉलर की स्पेस इकोनॉमी में से 11 अरब डॉलर अंतरराष्ट्रीय बाजार से हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

प्राइवेट कंपनियों को टेक्नोलॉजी दे रहा इसरो

गोयनका ने बताया कि इसरो धीरे-धीरे रिसर्च, नई टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जबकि सामान्य मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम प्राइवेट कंपनियों की तरफ बढ़ रहे हैं।

अब तक इसरो की 120 टेक्नोलॉजी प्राइवेट सेक्टर को ट्रांसफर की जा चुकी हैं।
 

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