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DU में 7.5 CGPA वालों के लिए बड़ा मौका; चार साल की डिग्री के बाद सीधे PhD में एंट्री बिना मास्टर्स

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्रों के लिए बड़ा बदलाव किया है। तय सीजीपीए हासिल करने वाले छात्र अब मास्टर्स किए बिना सीधे पीएचडी के लिए अप्लाई कर सकेंगे। यह मौका फिलहाल 2026-27 अकादमिक सेशन के लिए स्पेशल मेजर के तौर पर दिया गया है।

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In Short

  • चार साल का एफवाईयूपी पूरा करने वाले योग्य छात्र सीधे पीएचडी के लिए अप्लाई कर सकेंगे
  • सामान्य छात्रों के लिए 7.5 सीजीपीए और एससी एसटी छात्रों के लिए 7.0 सीजीपीए जरूरी
  • डायरेक्ट पीएचडी का यह स्पेशल मौका फिलहाल अकादमिक सेशन 2026-27 के लिए लागू

दिल्ली यूनिवर्सिटी में चार साल का अंडरग्रेजुएट कोर्स पूरा करने वाले छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई का रास्ता अब बदलने जा रहा है। अब अच्छे अकादमिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को रिसर्च के लिए पहले मास्टर्स करना जरूरी नहीं होगा। यूनिवर्सिटी ने एफवाईयूपी के पहले बैच को देखते हुए ऐसा रास्ता खोला है, जिससे योग्य छात्र सीधे पीएचडी तक पहुंच सकेंगे। आइए जानते हैं किन छात्रों को यह मौका मिलेगा और इसके लिए यूनिवर्सिटी ने क्या नियम तय किए हैं।

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7.5 CGPA वाले छात्र सीधे कर सकेंगे PhD

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने 21 अगस्त 2026 को जारी अपने ऑफिशियल प्रेस रिलीज में बताया कि चार साल का एफवाईयूपी पूरा करने वाले छात्र सीधे पीएचडी के लिए अप्लाई कर सकेंगे। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यह स्पेशल व्यवस्था की गई है। इसके तहत 2026 में एफवाईयूपी पूरा करने वाले छात्रों के कम से कम 7.5 सीजीपीए होने चाहिए। एससी और एसटी छात्रों के लिए यह सीमा 7.0 सीजीपीए रखी गई है। एडमिशन यूनिवर्सिटी के मौजूदा नियमों के मुताबिक होगा।

नियमों में किया गया बदलाव

सीधे पीएचडी में एडमिशन का रास्ता खोलने के लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपने ऑर्डिनेंस VI में बदलाव किया है। इसे अकादमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मंजूरी मिल चुकी है। यूनिवर्सिटी का मानना है कि चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा करने वाले अच्छे छात्रों को रिसर्च में जाने के लिए अलग से मास्टर्स करना जरूरी नहीं होना चाहिए।

FYUP के चौथे साल में पहुंचे 35,943 छात्र

एफवाईयूपी को 2022-23 अकादमिक ईयर में शुरू किया गया था और इसमें 75,948 छात्रों ने एडमिशन लिया था। तीसरा साल पूरा होने के बाद 2025 में 40,005 छात्रों ने तीन साल की पारंपरिक डिग्री लेकर कोर्स छोड़ दिया। वहीं 35,943 छात्रों ने चौथे साल की पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया। इस चौथे साल में रिसर्च, एंटरप्रेन्योरशिप और प्रैक्टिकल स्किल्स पर ज्यादा फोकस रखा गया है।

वन ईयर PG के लिए भी दिखी मजबूत डिमांड

चार साल का कोर्स पूरा करने वाले छात्रों के लिए डीयू ने पोस्टग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क 2025 के तहत 46 विषयों में एक साल का पीजी प्रोग्राम भी शुरू किया। इसमें कुल 5,857 सीटें रखी गईं। इनमें 2,807 रेगुलर और 3,035 ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग मोड की सीटें थीं। चार साल के 35,943 छात्रों में से 12,111 ने इस वन ईयर पीजी प्रोग्राम के लिए अप्लाई किया। यह 34.27 प्रतिशत कंटिन्यूएशन रेट रहा, जबकि उपलब्ध सीटों के मुकाबले आवेदन का आंकड़ा 48.36 प्रतिशत रहा।

तीन साल की डिग्री वालों के लिए पुराना रास्ता जारी

जिन छात्रों ने तीसरे साल के बाद एफवाईयूपी छोड़कर तीन साल की डिग्री ली थी, उनके लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी ने दो साल के मास्टर्स की सीटें जारी रखी हैं। नया डायरेक्ट पीएचडी रास्ता उन छात्रों के लिए है, जिन्होंने पूरा चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा किया है और जरूरी सीजीपीए हासिल किया है।

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चौथे साल में रिसर्च और स्किल्स पर फोकस

एफवाईयूपी के चौथे साल में अकादमिक ट्रैक चुनने वाले छात्रों को वास्तविक समस्याओं पर काम करना होता है और रिसर्च के जरिए उनके समाधान तलाशने होते हैं। इसके साथ स्किल बेस्ड कोर्स, इंटर्नशिप और कम्युनिटी आउटरीच को भी शामिल किया गया है। इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 25 कॉलेजों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स बनाए गए हैं, जिन्हें यूनिवर्सिटी फंडिंग और उद्यमोदया फाउंडेशन का सपोर्ट मिला है।

सिर्फ 2026-27 के लिए स्पेशल मौका

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि 2026 में एफवाईयूपी पूरा करने वाले पहले बैच के हित में फिलहाल यह डायरेक्ट पीएचडी एडमिशन व्यवस्था केवल अकादमिक सत्र 2026-27 के लिए स्पेशल मेजर के तौर पर लागू की गई है। यानी जरूरी सीजीपीए पूरा करने वाले छात्रों को इस सत्र में मास्टर्स किए बिना सीधे पीएचडी के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा।