विदेशी निवेशक भारत आने से क्यों डर रहे हैं? P Chidambaram ने बताई बड़ी वजह
भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बड़ी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि जटिल नियम और धीमी प्रक्रिया निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर रहे हैं। BusinessTodayIndia@100Summit में उन्होंने नियमों को आसान बनाने और पूरी व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

BusinessTodayIndia@100 Summit: भारत में विदेशी निवेश को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक भारत में आने से डर रहे हैं और इसकी बड़ी वजह देश में मौजूद नियमों की जटिल व्यवस्था है। उनके मुताबिक कारोबार के लिए नियम आसान और साफ होने चाहिए ताकि निवेशकों का भरोसा बढ़ सके।
BusinessTodayIndia@100 Summit में बोलते हुए पी चिदंबरम ने कहा कि विदेशी निवेशकों को भारत की रेगुलेटरी व्यवस्था से डर लगता है। उन्होंने कहा कि नियमों में बार बार छोटे बदलाव करने की जगह पूरी व्यवस्था को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है।
नियमों में बड़े बदलाव की जरूरत
पी चिदंबरमने कहा कि पुराने नियमों को धीरे धीरे सुधारने से समस्या खत्म नहीं होगी। उन्होंने 1991 के आर्थिक सुधारों का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय पुरानी व्यवस्था को हटाकर नई नीति बनाई गई थी।
उन्होंने कहा कि आज कई क्षेत्रों में नियमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। एक अधिकारी नियम बनाता है, फिर दूसरा अधिकारी उसमें कुछ और जोड़ देता है। इसी तरह धीरे धीरे नियम इतने ज्यादा हो जाते हैं कि उन्हें समझना और उनका पालन करना मुश्किल हो जाता है।
जटिल नियमों से निवेशकों को परेशानी
पी चिदंबरम ने कहा कि बिजली, दिवाला और दिवालियापन जैसे कई क्षेत्रों में नियम बहुत ज्यादा हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में निवेशकों के लिए कारोबार करना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशक ऐसे देश में पैसा लगाना चाहते हैं जहां नियम आसान हों और फैसले जल्दी लिए जा सकें। भारत को निवेश बढ़ाने के लिए नियमों को सरल बनाने पर ध्यान देना होगा।
IBC और कोर्ट प्रक्रिया पर उठाए सवाल
पी चिदंबरम ने दिवाला और दिवालियापन कानून यानी IBC पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यह कानून समय पर समाधान के लिए बनाया गया था, लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया लंबी होने से इसमें देरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सिर्फ सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने NCLT और NCLAT में खाली पदों और नियुक्तियों की स्थिति पर भी सवाल उठाए।
न्याय प्रक्रिया में देरी का उदाहरण दिया
पी चिदंबरम ने एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि कोविड के दौरान एक केस की सुनवाई कई दिनों तक चली। उन्होंने बताया कि वकीलों ने कई दस्तावेजों के साथ इस मामले पर काम किया, लेकिन फैसला आने में करीब एक साल लग गया।
उन्होंने कहा कि बाद में सिर्फ तीन लाइन का आदेश दिया गया कि मामले को रिलीज किया जाता है। उन्होंने ऐसी देरी को न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी चिंता बताया।
पी चिदंबरम ने कहा कि भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए आसान नियम, बेहतर व्यवस्था और तेज फैसले लेने वाली प्रणाली जरूरी है।

