FCRA Rules 2026: विदेशी फंड लेने वाले NGOs पर बढ़ी सख्ती, रजिस्ट्रेशन से खर्च तक बदल गए ये बड़े नियम
FCRA Rules 2026 के बाद विदेशी फंड लेने वाले NGOs के लिए कंप्लायंस और सख्त हो गया है। अब फंड के इस्तेमाल से लेकर काम की लोकेशन डोनर की जानकारी और रजिस्ट्रेशन तक ज्यादा डिटेल देनी होगी। कुछ मामलों में न्यूनतम खर्च और अगली किस्त से पहले 75% फंड इस्तेमाल की शर्त भी लागू होगी।

In Short
- विदेशी फंड का इस्तेमाल केवल मंजूर एक्टिविटीज और तय क्षेत्रों में ही किया जा सकेगा
- पिछली किस्त का कम से कम 75% खर्च करने के बाद ही अगली किस्त लेने की शर्त
- Annual Return में डोनर प्रोजेक्ट वेबसाइट सोशल मीडिया और खर्च की ज्यादा डिटेल देनी होगी
विदेशी फंड लेने वाले NGOs और दूसरी संस्थाओं के लिए अब नियम पहले से ज्यादा सख्त हो गए हैं। फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट रूल्स 2026 में फंड कहां से आया, किस काम में खर्च हुआ और संस्था किन इलाकों में काम कर रही है, इन सभी बातों पर ज्यादा नजर रखी जाएगी। नए रूल्स 22 जून को नोटिफाई हो चुके हैं, जबकि प्रस्तावित FCRA अमेंडमेंट बिल 2026 अभी कानून नहीं बना है। ऐसे में संस्थाओं को अब अपने रजिस्ट्रेशन से लेकर फंड के इस्तेमाल तक कई नई बातों का ध्यान रखना होगा।
अब Key Functionary की भी साफ परिभाषा
नए रूल्स में Key Functionary की अलग परिभाषा जोड़ी गई है। इससे कंप्लायंस का दायरा सिर्फ डायरेक्टर या ऑफिस बियरर तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्तावित बिल में डायरेक्टर, पार्टनर, ट्रस्टी और संस्था पर कंट्रोल रखने वाले दूसरे लोगों को भी इसमें शामिल करने की बात है।
विदेशी नागरिक होने पर बढ़ेगी जांच
अगर किसी संस्था में कोई विदेशी नागरिक Key Functionary है तो उसके FCRA रजिस्ट्रेशन या प्रायर परमिशन पर ज्यादा सख्त नियम लागू होंगे। इससे संस्था की गवर्नेंस स्ट्रक्चर भी अब जांच का अहम हिस्सा बनेगी।
जिस काम की मंजूरी उसी में खर्च होगा फंड
विदेशी फंड का इस्तेमाल केवल उन्हीं एक्टिविटीज में किया जा सकेगा जिनके लिए संस्था को मंजूरी मिली है। यानी किसी दूसरे काम में फंड इस्तेमाल करने पर कंप्लायंस से जुड़ी परेशानी हो सकती है।
राज्य और काम का क्षेत्र भी बताना होगा
अब रजिस्ट्रेशन केवल संस्था के नाम पर नहीं बल्कि उसके काम के उद्देश्य और लोकेशन से भी जुड़ा होगा। संस्थाओं को यह बताना होगा कि वे किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में काम करेंगी। पहले से रजिस्टर्ड संस्थाओं को एक साल के भीतर Form FC-6F में यह जानकारी देनी होगी।
दो साल में ₹10 लाख खर्च जरूरी
रिन्यूअल या कैंसिलेशन के मामले में किसी संस्था को reasonable activity करने वाला तभी माना जाएगा जब उसने पिछले दो फाइनेंशियल ईयर में अपने तय उद्देश्यों पर कम से कम ₹10 लाख का विदेशी फंड खर्च किया हो। इसमें तय शर्तें और कुछ अपवाद भी लागू होंगे।
अगली किस्त से पहले 75% फंड खर्च
प्रायर परमिशन के तहत विदेशी फंड की किस्त पाने वाली संस्था को अगली किस्त लेने से पहले पिछली किस्त का कम से कम 75% खर्च करना होगा। नए Form FC-3BB में इसके लिए सर्टिफिकेशन और वेरिफिकेशन भी देना होगा।
Annual Return में देनी होगी ज्यादा जानकारी
Form FC-4 में अब UDIN, अंतिम डोनर की जानकारी, अलग-अलग एक्टिविटी पर हुआ खर्च, प्रोजेक्ट डिटेल्स, वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट और पब्लिकेशन की जानकारी भी देनी होगी।
नियम तोड़ने पर बढ़ेगा जुर्माना
स्पेक्युलेटिव इन्वेस्टमेंट और मंजूरी के बाहर फंड खर्च करने जैसे मामलों को भी कंपाउंडिंग फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है। कई मामलों में पेनल्टी रकम का 30% या ₹1 लाख, जो ज्यादा हो, हो सकती है।
रजिस्ट्रेशन खत्म होने पर फंड पर रोक का प्रस्ताव
प्रस्तावित बिल में Section 14B जोड़ने की बात है। इसके तहत रजिस्ट्रेशन खत्म होने या रिन्यू नहीं होने पर संस्था विदेशी फंड न तो ले सकेगी और न ही उसका इस्तेमाल कर सकेगी, जब तक रजिस्ट्रेशन दोबारा रिन्यू नहीं हो जाता।
विदेशी फंड से बनी संपत्ति पर भी नया फ्रेमवर्क
प्रस्तावित बिल में विदेशी फंड और उससे बनी एसेट्स के मैनेजमेंट, वेस्टिंग, रिस्टोरेशन और डिस्पोजल के लिए Designated Authority का नया सिस्टम बनाने का प्रस्ताव है। कुल मिलाकर FCRA कंप्लायंस अब पहले से ज्यादा डिटेल्ड होगा और NGOs को हर फंड के इस्तेमाल का साफ रिकॉर्ड रखना होगा।

