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न खाना मिलेगा न डिलीवरी आएगी! फिर भी वायरल हुई ये वेबसाइट, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

क्या बिना खाना खाए भी फूड डिलीवरी का मजा लिया जा सकता है? FoodNeverComes नाम की वेबसाइट ने इसी आइडिया से लोगों का ध्यान खींचा है। यहां ऑर्डर, पेमेंट और डिलीवरी कॉल सब कुछ नकली है, फिर भी लाखों लोग इस अनोखे अनुभव को आजमा चुके हैं।

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AI Generated Image

In Short

  • FoodNeverComes वेबसाइट पर यूजर्स फर्जी फूड ऑर्डर, चेकआउट और AI डिलीवरी कॉल का अनुभव ले सकते हैं।
  • उदयपुर के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स पूर्वांश पारमार और अंशुल शर्मा ने इस वेबसाइट को बनाया है।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अनुभव लोगों की ऑर्डर करने की इच्छा और उपभोग से जुड़े व्यवहार को समझने की कोशिश करता है।

ऑनलाइन फूड डिलीवरी का अनुभव अब बिना खाना खरीदे भी लिया जा सकता है। एक ऐसी वेबसाइट FoodNeverComes ने लोगों का ध्यान खींचा है, जहां यूजर्स फूड मेन्यू देख सकते हैं, ऑर्डर प्लेस कर सकते हैं और डिलीवरी ट्रैक भी कर सकते हैं, लेकिन असल में खाना कभी नहीं आता।

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फर्जी फूड डिलीवरी का पूरा अनुभव

मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जून में लॉन्च हुई FoodNeverComes वेबसाइट को अब तक 27 लाख से ज्यादा विजिटर्स मिल चुके हैं। यह वेबसाइट एक नकली फूड डिलीवरी अनुभव देती है, जिसमें फर्जी कीमतें, चेकआउट और AI से तैयार की गई डिलीवरी राइडर की कॉल भी शामिल है।

इस प्लेटफॉर्म पर 22 फर्जी किचन, 327 डिश और 319 असली रेसिपी मौजूद हैं। यूजर्स मेन्यू ब्राउज कर सकते हैं, पसंदीदा डिश को कार्ट में जोड़ सकते हैं और ऑर्डर की कुल कीमत बढ़ते हुए देख सकते हैं।

इसके बाद वेबसाइट एक काल्पनिक डिलीवरी अनुभव तैयार करती है, जिसमें एक राइडर का कॉल आता है। राइडर कहता है कि वह यूजर की बिल्डिंग के बाहर है, लेकिन उसे सड़क या दरवाजा नहीं मिल रहा।

वेबसाइट का स्लोगन है- “The food never comes - but the dopamine does.”

ऑर्डर करने की आदत से आया आइडिया

FoodNeverComes को राजस्थान के उदयपुर के 26 साल के सॉफ्टवेयर डेवलपर्स पूर्वांश पारमार और अंशुल शर्मा ने बनाया है।

इसका आइडिया उन्हें अपनी ऑनलाइन शॉपिंग आदतों से आया। अंशुल शर्मा ने देखा कि वह कई बार इलेक्ट्रॉनिक्स ब्राउज करते हैं, सामान कार्ट में डालते हैं लेकिन खरीदारी पूरी नहीं करते। पूर्वांश पारमार ने भी अपनी मां में ऐसी ही आदत देखी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

पारमार ने बताया कि मुंबई में दो महीने के प्रोजेक्ट के दौरान उन्होंने खाने पर हर हफ्ते 5,000 से 10,000 रुपये तक खर्च किए। कई बार उन्होंने ऐसी चीजें भी ऑर्डर कीं, जिनकी उन्हें वास्तव में जरूरत नहीं थी।

उन्होंने सोचना शुरू किया कि क्या लोगों को कई बार खाने से ज्यादा ऑर्डर करने की प्रक्रिया पसंद आती है।

ऑर्डर करने के पीछे की सोच

येल सेंटर फॉर कस्टमर इनसाइट्स के निदेशक रवि धर इसे “anticipatory utility” कहते हैं। इसका मतलब है किसी चीज को मिलने से पहले ही उसके इंतजार में मिलने वाला आनंद।

मिशिगन यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट केंट बेरिज के अनुसार, किसी चीज को चाहना और उसे पसंद करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उनके मुताबिक, डोपामाइन का संबंध सिर्फ खुशी से नहीं बल्कि किसी चीज को पाने की इच्छा से भी जुड़ा है।

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स्टैनफोर्ड की एडिक्शन साइकेट्रिस्ट अन्ना लेम्बके भी कहती हैं कि डोपामाइन सिर्फ खुशी देने वाला केमिकल नहीं है, बल्कि किसी इनाम की उम्मीद भी व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

क्या नकली ऑर्डर इच्छा को पूरा कर सकते हैं?

इसका अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। केंट बेरिज का मानना है कि ऐसी वेबसाइट लोगों में “चाहत” पैदा कर सकती है, लेकिन समय के साथ इसका असर कम हो सकता है।

वहीं, रवि धर के अनुसार, इस तरह का अनुभव किसी उपभोक्ता की इच्छा को पूरा कर सकता है, लेकिन इसके लिए और रिसर्च की जरूरत है। दूसरी ओर, अन्ना लेम्बके का कहना है कि बार-बार इस्तेमाल करने से कुछ आदतें और मजबूत भी हो सकती हैं।

FoodNeverComes के बाद इसके फाउंडर्स ने TripNeverLeaves नाम की वेबसाइट भी बनाई है, जहां यूजर्स छुट्टी की योजना बना सकते हैं और वर्चुअल फ्लाइट ले सकते हैं, लेकिन विमान कभी उड़ान नहीं भरता। इस वेबसाइट को भी 1 लाख से ज्यादा विजिटर्स मिल चुके हैं।