फ्रांस में Shamonda वायरस का पहला इंसानी मामला, मरीज की मौत से बढ़ी चिंता; जानवरों से इंसानों में संक्रमण की जांच
फ्रांस में एक ऐसे वायरस का पहला इंसानी मामला सामने आया है, जो अब तक मुख्य रूप से जानवरों में पाया जाता था। संक्रमित मरीज की मौत के बाद यूरोपीय स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हैं। आखिर यह वायरस कैसे फैलता है, इसका जानवरों और डेयरी कारोबार पर क्या असर पड़ा है और क्या आम लोगों को चिंता करने की जरूरत है?

In Short
- फ्रांस में Shamonda वायरस का पहला इंसानी मामला सामने आया और मरीज की मौत हो गई।
- स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल आम लोगों के लिए किसी खतरे की पहचान नहीं हुई है।
- फ्रांस के नौ डेयरी फार्म पर संक्रमित मवेशियों में दूध उत्पादन 75% तक घटा।
फ्रांस में Shamonda वायरस का पहला इंसानी मामला सामने आया है। इस वायरस से संक्रमित मरीज की अक्टूबर की शुरुआत में मौत हो गई। यह वायरस अब तक मुख्य रूप से जानवरों में पाया जाता रहा है। हालांकि, फ्रांस के स्वास्थ्य अधिकारियों ने फिलहाल आम लोगों के लिए किसी खतरे की आशंका नहीं जताई है। इस मामले में जांच जारी है।
मरीज की मौत की वजह अभी साफ नहीं
यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) के मुताबिक, मरीज पहले से एक गंभीर बीमारी का इलाज करा रहा था। इस बीमारी के कारण मरीज का शरीर संक्रमण के प्रति ज्यादा कमजोर था। अभी यह पता लगाया जा रहा है कि मरीज की मौत Shamonda वायरस की वजह से हुई या इसने मौत में कोई भूमिका निभाई। मरीज को यह संक्रमण कैसे हुआ, इसकी भी जांच की जा रही है।
आम लोगों को फिलहाल खतरा नहीं
फ्रांस के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल आम लोगों के स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं पाया गया है। शुरुआती अनुमान है कि मरीज को पूर्वी फ्रांस में संक्रमण हुआ होगा। इस इलाके में वसंत और गर्मियों के दौरान जानवरों में यह वायरस फैलने की जानकारी मिली थी। ECDC फ्रांस के अधिकारियों और दूसरे यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रख रहा है।
क्या है Shamonda वायरस और कैसे फैलता है?
Shamonda वायरस की पहचान पहली बार 1960 के दशक के मध्य में नाइजीरिया में हुई थी। यह मुख्य रूप से मवेशियों में पाया जाता है और काटने वाले छोटे कीड़ों यानी मिज (Midges) के जरिए फैलता है। वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ (WOAH) के मुताबिक, यह वायरस घोड़ों, अल्पाका, भेड़ और बकरियों में भी पाया गया है। फिलहाल इस वायरस से बचाव के लिए बाजार में कोई व्यावसायिक वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
यूरोप के कई देशों में फैल चुका है वायरस
यूरोप में इस वायरस की मौजूदगी पहली बार जुलाई के आखिर में सामने आई थी। जीनोमिक टेस्टिंग के जरिए दक्षिणी जर्मनी, स्विट्जरलैंड और पूर्वी फ्रांस में बीमार मवेशियों में वायरस की पुष्टि हुई थी। इसके बाद फ्रांस की साप्ताहिक पशु स्वास्थ्य निगरानी रिपोर्ट में ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, आयरलैंड, इटली, लिकटेंस्टीन, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, स्पेन और जर्सी में भी इसके मिलने की जानकारी दी गई।
डेयरी फार्म पर भी पड़ा असर
Shamonda वायरस का असर संक्रमित मवेशियों के दूध उत्पादन पर भी पड़ा है। फ्रांस के नौ डेयरी फार्म पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि प्रभावित मवेशियों के झुंड में दूध का उत्पादन 75% तक गिर गया। इससे डेयरी कारोबार को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, इंसानों में संक्रमण का पहला मामला सामने आने के बाद यूरोपीय स्वास्थ्य एजेंसियां निगरानी बढ़ा रही हैं। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल आम आबादी के लिए किसी खतरे की पहचान नहीं हुई है।

