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NRI Tax Refund: गलती से भर दिए ₹1.70 लाख टैक्स, ITAT के फैसले से सिंगापुर में रहने वाले भारतीय को मिली राहत

सिंगापुर में रहने वाले एक भारतीय ने म्यूचुअल फंड से कमाई पर ₹1.70 लाख टैक्स जमा कर दिए थे। बाद में उसे एक ऐसे टैक्स नियम का पता चला, जिससे उसका पूरा मामला बदल गया। ITAT के फैसले ने रिफंड की उम्मीद जगाई है। जानिए NRI के लिए क्या है पूरा मामला।

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In Short

  • सिंगापुर में रहने वाले भारतीय ने म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेन पर ₹1.70 लाख टैक्स जमा किए थे।
  • ITAT पुणे ने India-Singapore DTAA के तहत उसके टैक्स क्लेम को मंजूरी दी।
  • - Revised ITR की समयसीमा निकलने के बाद भी कुछ परिस्थितियों में अपील के जरिए टैक्स राहत मिल सकती है।

सिंगापुर में रहने वाले एक भारतीय को भारत में म्यूचुअल फंड से हुई कमाई पर जमा किए गए ₹1.70 लाख के टैक्स को वापस पाने का रास्ता मिल गया है। Income Tax Appellate Tribunal (ITAT) पुणे ने उसके India-Singapore DTAA के तहत किए गए दावे को मंजूरी दे दी। यह मामला उन NRI के लिए अहम है, जो टैक्स के नियमों की सही जानकारी नहीं होने के कारण ज्यादा टैक्स भर देते हैं। इस पूरे मामले में समझने वाली बात है कि टैक्स रिफंड का दावा क्यों किया गया और ITAT ने किस आधार पर राहत दी।

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कैसे जमा हो गया ₹1.70 लाख का टैक्स?

TaxBuddy के फाउंडर सुजीत बांगर के मुताबिक, वरुण नाम का यह व्यक्ति सिंगापुर में रहता और काम करता है। उसने भारत के म्यूचुअल फंड में निवेश किया था। कुछ निवेश बेचने के बाद उसने ₹1.70 लाख कैपिटल गेन टैक्स के तौर पर जमा किए और अपना Income Tax Return (ITR) भी फाइल कर दिया। बाद में उसे पता चला कि वह India-Singapore Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) के तहत टैक्स में राहत का दावा कर सकता है। उसके मुताबिक, संबंधित कमाई पर भारत में टैक्स की देनदारी नहीं बनती थी।

क्या है India-Singapore DTAA का नियम?

DTAA भारत और सिंगापुर के बीच टैक्स से जुड़े अधिकारों को तय करने वाला समझौता है। इसके तहत किस देश में कमाई पर टैक्स लगेगा, यह इनकम की कैटेगरी, समझौते के नियमों और टैक्सपेयर की स्थिति पर निर्भर करता है। वरुण का दावा था कि उसके म्यूचुअल फंड से हुए कैपिटल गेन पर केवल सिंगापुर में टैक्स लग सकता है। उसके मामले में ऐसी कमाई पर वहां आम तौर पर टैक्स नहीं लगता। इसी आधार पर उसने भारत में टैक्स की देनदारी शून्य होने की बात कही।

Income Tax Department ने क्यों रोका रिफंड?

टैक्स में राहत का पता चलने के बाद वरुण ने रिफंड मांगा, लेकिन तब तक Revised ITR फाइल करने की समयसीमा खत्म हो चुकी थी। टैक्स अधिकारियों ने कथित तौर पर यह कहते हुए उसका दावा स्वीकार नहीं किया कि राहत का दावा मूल ITR दाखिल करते समय ही किया जाना चाहिए था। इसके बाद वरुण ने ITAT पुणे का रुख किया। उसका तर्क था कि केवल समय पर दावा नहीं करने के कारण उसे टैक्स समझौते के तहत मिलने वाली कानूनी राहत से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

किन पुराने फैसलों से मिला सहारा?

वरुण ने अपने पक्ष में पहले के अदालती फैसलों का हवाला दिया। इनमें Bombay High Court का Pruthvi Brokers & Shareholders मामला और Mumbai ITAT का Anushka Sanjay Shah मामला शामिल था। इन फैसलों से यह सिद्धांत सामने आता है कि उचित परिस्थितियों में अपील के दौरान भी वैध टैक्स क्लेम पर विचार किया जा सकता है, भले ही उसका दावा मूल ITR में नहीं किया गया हो। हालांकि, हर मामले में राहत मिलना अपने आप तय नहीं होता।

ITAT के फैसले से NRI को क्या राहत मिली?

12 अक्टूबर 2026 को ITAT पुणे ने वरुण के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसके DTAA क्लेम को मंजूरी दे दी। इससे ₹1.70 लाख के रिफंड का रास्ता साफ हुआ। इस फैसले का मतलब है कि Revised ITR की समयसीमा निकल जाने के बाद भी कुछ परिस्थितियों में अपील के जरिए वैध टैक्स क्लेम उठाया जा सकता है। राहत मिलेगी या नहीं, यह लागू नियमों, दस्तावेजों और मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा।

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NRI को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

भारत में निवेश करने वाले NRI को अपना टैक्स रिटर्न फाइल करते समय लागू DTAA के नियम जांचने चाहिए। साथ ही वैध Tax Residency Certificate (TRC) और दूसरे जरूरी दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए। अगर मूल ITR में कोई राहत क्लेम करना छूट गया है, तो टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेकर उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करना चाहिए। सिर्फ समयसीमा निकल जाने के कारण यह मान लेना सही नहीं है कि जमा किया गया टैक्स कभी वापस नहीं मिल सकता।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।