scorecardresearch

PG बिल्डिंग हादसे के बाद दिल्ली में सख्ती, CCTV से डिपॉजिट तक बदलेंगे नियम: जानिए पूरी बात

दिल्ली में अब PG चलाने के लिए नए नियम लागू करने की तैयारी है। सरकार के प्रस्तावित बिल में रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस, किराया नियंत्रण, CCTV और सुरक्षा व्यवस्था को जरूरी बनाने की बात कही गई है। सत्य निकेतन PG हादसे के बाद लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद छात्रों के लिए सुरक्षित और पारदर्शी आवास व्यवस्था तैयार करना है।

Advertisement

In Short

  • दिल्ली के हर PG को 90 दिन के अंदर कराना होगा रजिस्ट्रेशन और लेना होगा ऑपरेटिंग लाइसेंस
  • PG संचालक तीन महीने से ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट और एडवांस किराया नहीं ले सकेंगे
  • 15 से ज्यादा छात्रों वाले PG में रात के समय सिक्योरिटी गार्ड और CCTV कैमरे होंगे जरूरी

दिल्ली में पेइंग गेस्ट (PG) में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित 'Paying Guest Accommodation Regulation and Welfare Bill' के तहत दिल्ली में चलने वाले सभी PG को रजिस्ट्रेशन कराना होगा और संचालन के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा।

advertisement

यह प्रस्ताव दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने की घटना में सात लोगों की मौत के बाद सामने आया है। नए नियमों के तहत दिल्ली के बड़े एजुकेशन हब जैसे मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, राजेंद्र नगर और नॉर्थ कैंपस के PG भी रेगुलेशन के दायरे में आएंगे।

90 दिन में लेना होगा लाइसेंस

प्रस्ताव के मुताबिक, हर PG संचालक को 90 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए पुलिस, नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना होगा।

रजिस्ट्रेशन के बाद हर PG को एक यूनिक Paying Guest Registration Number (PGRN) दिया जाएगा। वहीं, सत्यापित PG की जानकारी एक डिजिटल सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे छात्र रहने की जगह चुनने से पहले उसकी जानकारी देख सकेंगे।

किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट पर भी नियंत्रण

नए प्रस्ताव में PG में मनमाने किराए और ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट की शिकायतों को दूर करने का भी प्रावधान है।

इसके लिए Rent Regulation Committee बनाई जाएगी, जो अलग-अलग इलाकों के हिसाब से किराए की सीमा तय करेगी। PG संचालक तीन महीने से ज्यादा का सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं ले सकेंगे और न ही तीन महीने से ज्यादा का एडवांस किराया मांग सकेंगे।

इसके अलावा PG छोड़ने वाले छात्रों के लिए 30 दिन का नोटिस पीरियड जरूरी होगा। किसी छात्र से लिंग, जाति, धर्म या राज्य के आधार पर अलग-अलग किराया वसूलने पर रोक लगाने का भी प्रस्ताव है।

CCTV और सुरक्षा गार्ड होंगे जरूरी

छात्रों की सुरक्षा के लिए PG में सुरक्षा व्यवस्था को अनिवार्य किया जाएगा। सभी एंट्री गेट और कॉमन एरिया में CCTV कैमरे लगाने होंगे और उनकी रिकॉर्डिंग 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी।

जिन PG में 15 या उससे ज्यादा छात्र रहेंगे, वहां रात के समय सिक्योरिटी गार्ड रखना जरूरी होगा। इसके अलावा विजिटर रजिस्टर बनाए रखना और 500 मीटर के दायरे में वॉर्डन की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी प्रस्ताव में शामिल है।

एक पोर्टल पर मिलेगी PG की पूरी जानकारी

advertisement

सरकार GovPG पोर्टल शुरू करने का प्रस्ताव भी लाई है। इस पोर्टल पर छात्रों को रजिस्टर्ड PG की जानकारी, किराया, सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी डिटेल मिलेगी।

छात्र इस पोर्टल के जरिए गुमनाम शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। साथ ही हर PG की कंप्लायंस रेटिंग भी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है, जिससे छात्र बेहतर विकल्प चुन सकें।

कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों की भी होगी भूमिका

प्रस्ताव में Institutional Accommodation Committee (IAC) बनाने की बात कही गई है, जिसमें कॉलेजों के शिक्षक, छात्र प्रतिनिधि, पुलिस और नगर निगम अधिकारी शामिल होंगे।

ये समितियां हर तीन महीने में PG की जांच करेंगी और विवादों को सुलझाने के लिए 15 कार्यदिवस की समय सीमा तय की गई है।

अच्छा रिकॉर्ड रखने वाले PG संचालकों को प्रोत्साहन देने का भी प्रस्ताव है। लगातार दो साल तक बेहतर अनुपालन करने वाले PG को प्रॉपर्टी टैक्स में छूट, आसान लोन और "Certified Student-Friendly PG" बैज मिलने की संभावना है।

पुराने मामलों के बाद उठे कदम

प्रस्तावित कानून में दिल्ली के PG सिस्टम की कमियों का भी जिक्र किया गया है। इसमें ओल्ड राजेंद्र नगर की 2024 की बेसमेंट घटना, मुखर्जी नगर में PG से जुड़ी सुरक्षा शिकायतें और यौन उत्पीड़न, हिडन कैमरा और ज्यादा बिजली शुल्क जैसी शिकायतों का उल्लेख है।

advertisement

सरकार का उद्देश्य PG व्यवस्था में सुरक्षा मानक तय करना, किराए में पारदर्शिता लाना और छात्रों के लिए शिकायत समाधान की बेहतर व्यवस्था तैयार करना है। हालांकि छोटे और अनौपचारिक PG को नियमों के दायरे में लाना, कई एजेंसियों से NOC लेना और अलग-अलग इलाकों के लिए किराया तय करना बड़ी चुनौतियां हो सकती हैं।