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डीमैट अकाउंट में रिकॉर्ड तेजी फिर भी एक्टिव निवेशक कम क्यों? जानें पूरी बात

भारत में डीमैट अकाउंट की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन एक्टिव निवेशकों की ग्रोथ उतनी तेज नहीं है। अगस्त में अकाउंट बेस 23.77 करोड़ पहुंच गया। अब ब्रोकरेज कंपनियों के सामने नए ग्राहकों को नियमित ट्रेडिंग और निवेश गतिविधियों से जोड़ने की चुनौती है।

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In Short

  • अगस्त में भारत के कुल डीमैट अकाउंट बढ़कर 237.7 मिलियन यानी करीब 23.77 करोड़ पहुंचे
  • NSE एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या बढ़कर करीब 4.6 करोड़ हुई, लेकिन एक्टिव रेशियो घटकर 19.3% रहा
  • Groww 29% मार्केट शेयर के साथ ब्रोकरेज इंडस्ट्री में सबसे आगे रहा

भारत में शेयर बाजार से जुड़ने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अगस्त 2026 में डीमैट अकाउंट की संख्या तेजी से बढ़ी, लेकिन इसके मुकाबले नियमित रूप से बाजार में सक्रिय रहने वाले निवेशकों की रफ्तार थोड़ी धीमी रही। यह संकेत देता है कि लोगों की बाजार में दिलचस्पी बढ़ रही है, लेकिन हर नया अकाउंट एक्टिव ट्रेडिंग में नहीं बदल रहा है।

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अगस्त में 33 लाख से ज्यादा नए डीमैट अकाउंट जुड़े

360 ONE Capital Research की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में देश में कुल डीमैट अकाउंट की संख्या बढ़कर 237.7 मिलियन यानी करीब 23.77 करोड़ हो गई। इसमें महीने-दर-महीने 1.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगस्त में 33 लाख नए डीमैट अकाउंट जुड़े, जो जनवरी 2026 के बाद सबसे ज्यादा मासिक बढ़ोतरी है।

रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर बाजार परिस्थितियों ने नए अकाउंट खुलने की रफ्तार बढ़ाने में मदद की।

इस बढ़ोतरी में सीडीएसएल (CDSL) का योगदान सबसे ज्यादा रहा। सीडीएसएल के डीमैट अकाउंट 1.5% बढ़कर 191 मिलियन हो गए। वहीं, इसके नए अकाउंट जुड़ने की रफ्तार भी 17.2% बढ़कर 27.4 लाख रही। इससे सीडीएसएल की बाजार हिस्सेदारी करीब 83.9% तक पहुंच गई।

दूसरी ओर, एनएसडीएल (NSDL) के अकाउंट 1.1% बढ़कर 46.7 मिलियन रहे, लेकिन नए अकाउंट जुड़ने की रफ्तार 3.7% घटकर 5.3 लाख रही।

एक्टिव निवेशकों की संख्या में धीमी बढ़त

डीमैट अकाउंट बढ़ने के बावजूद एक्टिव निवेशकों की संख्या उतनी तेजी से नहीं बढ़ी। अगस्त में NSE के एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या 1.1% बढ़कर करीब 4.6 करोड़ हो गई। यह साल 2026 में पहली बार है जब यह आंकड़ा 4.6 करोड़ के करीब पहुंचा।

हालांकि, पिछले साल की तुलना में एक्टिव क्लाइंट्स की संख्या अभी भी 0.5% कम है। इसी वजह से कुल डीमैट अकाउंट के मुकाबले एक्टिव अकाउंट का अनुपात घटकर 19.3% रह गया, जो पिछले महीने से 5 बेसिस प्वाइंट कम है।

ब्रोकरेज के सामने अकाउंट को एक्टिव बनाने की चुनौती

ब्रोकरेज कंपनियों के लिए अब सिर्फ नए ग्राहक जोड़ना काफी नहीं होगा। बड़ी चुनौती यह है कि ज्यादा से ज्यादा डीमैट अकाउंट को नियमित ट्रेडिंग और निवेश गतिविधियों में बदला जाए।

रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ा ग्राहक आधार भविष्य के लिए अच्छा मौका देता है, लेकिन असली ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने लोग बाजार में लगातार सक्रिय रहते हैं।

Groww की बढ़त जारी

ब्रोकरेज इंडस्ट्री में अगस्त में बड़ी तस्वीर ज्यादा नहीं बदली। टॉप तीन ब्रोकर्स ने अपनी स्थिति बनाए रखी। Groww 29% मार्केट शेयर के साथ सबसे आगे रहा और इसकी हिस्सेदारी महीने में 16 बेसिस प्वाइंट बढ़ी।

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वहीं, Zerodha 14.8% मार्केट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि Angel One की हिस्सेदारी 14.6% रही।

Angel One का कुल क्लाइंट बेस 1.36% बढ़कर 3.96 करोड़ हो गया, हालांकि NSE एक्टिवेशन रेट 17% पर स्थिर रहा।

कुल मिलाकर अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि भारत में निवेशकों का आधार फिर से बढ़ रहा है, लेकिन बाजार की अगली ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि नए डीमैट अकाउंट कितने एक्टिव निवेशकों में बदल पाते हैं।

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।