फ्लाइट के बाद आप भी बोर्डिंग पास फेंक देते हैं? पहले जान लें इससे जुड़े बड़े फायदे और सुरक्षा के नियम
फ्लाइट का सफर खत्म होते ही बोर्डिंग पास फेंक देना बाद में परेशानी बढ़ा सकता है। यह छोटा सा कागज सफर से जुड़े कई जरूरी कामों में मदद कर सकता है। जानिए इसे क्यों संभालकर रखना चाहिए और कब इसे डिलीट या फाड़कर फेंकना सही है।

In Short
- बोर्डिंग पास आपके फ्लाइट सफर का पक्का सबूत होता है और रिफंड, बीमा क्लेम या ऑफिस से खर्च वापस लेने में काम आ सकता है।
- एयर माइल्स खाते में न जुड़ें या सीट अपग्रेड की जानकारी चाहिए हो, तो बोर्डिंग पास मददगार साबित होता है।
- इसमें नाम, बुकिंग नंबर जैसी निजी जानकारी होती है, इसलिए जरूरत खत्म होने पर इसे छोटे टुकड़ों में फाड़कर ही फेंकें।
Boarding Pass Matters: फ्लाइट से उतरने के बाद कई लोग बोर्डिंग पास को बेकार समझकर फेंक देते हैं या मोबाइल से उसकी कॉपी डिलीट कर देते हैं। लेकिन सफर खत्म होने के बाद भी यह आपके काम आ सकता है। तो आखिर कैसे बोर्डिंग पास आपकी यात्रा का सबूत बनता है?
यात्रा का सबूत बनता है बोर्डिंग पास
बोर्डिंग पास यह साबित करता है कि आपने उस फ्लाइट में सफर किया था। आमतौर पर एयरलाइन के पास यात्रियों का डिजिटल रिकॉर्ड रहता है, लेकिन कभी-कभी सिस्टम में गड़बड़ी हो सकती है। खासकर तब, जब सफर में एक से ज्यादा एयरलाइन या कनेक्टिंग फ्लाइट शामिल हों।
ऐसे समय में बोर्डिंग पास आपके सफर का पक्का सबूत बन सकता है। ऑफिस से यात्रा का खर्च वापस लेने, वीजा के लिए सफर का रिकॉर्ड देने या एयरलाइन से रिफंड मांगने में इसकी जरूरत पड़ सकती है।
लेकिन अगर फ्लाइट से सफर करने के बाद आपके एयर माइल्स खाते में नहीं आए, तो बोर्डिंग पास किस तरह काम आएगा?
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नहीं मिले एयर माइल्स तो आएगा काम
कई यात्री एयरलाइन के फ्रीक्वेंट फ्लायर प्रोग्राम से जुड़े होते हैं। फ्लाइट का सफर पूरा होने के बाद भी कभी-कभी उनके खाते में एयर माइल्स नहीं जुड़ते।
बोर्डिंग पास पर फ्लाइट नंबर, टिकट और सफर से जुड़ी जरूरी जानकारी होती है। इसकी मदद से एयरलाइन की ग्राहक सेवा में शिकायत करके माइल्स खाते में जुड़वाए जा सकते हैं। बोर्डिंग पास न होने पर यह काम मुश्किल हो सकता है। लेकिन बीमा का पैसा या रिफंड लेने में बोर्डिंग पास किस तरह मदद करता है?
बीमा और रिफंड के दावे में मदद
फ्लाइट में देरी होने, सफर रद्द होने या सामान खोने पर बीमा कंपनी, क्रेडिट कार्ड कंपनी या एयरलाइन से क्लेम किया जा सकता है।ऐसे मामलों में सफर का सबूत मांगा जाता है।
बोर्डिंग पास पर तारीख, फ्लाइट नंबर और सफर का समय लिखा होता है, जिससे आपका क्लेम मजबूत होता है। सही कागजात न होने पर क्लेम अटक सकता है या खारिज भी हो सकता है। लेकिन लाउंज के इस्तेमाल या सीट अपग्रेड की पुष्टि करने में बोर्डिंग पास कैसे काम आता है?
लाउंज और अपग्रेड की जानकारी
एयरपोर्ट लाउंज में जाने के लिए बोर्डिंग पास दिखाना पड़ सकता है। अगर आपकी सीट बिजनेस क्लास या किसी दूसरी कैटेगरी में अपग्रेड हुई है, तो बोर्डिंग पास पर नई सीट और क्लास की जानकारी मिल जाती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि बोर्डिंग पास के बारकोड में आपकी कौन-कौन सी निजी जानकारी छिपी हो सकती है?
बारकोड में छिपी होती है निजी जानकारी
बोर्डिंग पास के बारकोड में आपका नाम, बुकिंग नंबर और फ्रीक्वेंट फ्लायर नंबर जैसी निजी जानकारी हो सकती है। इसलिए इसे बिना फाड़े खुले कूड़ेदान में फेंकना ठीक नहीं है।
सफर के बाद बोर्डिंग पास को कुछ हफ्तों तक संभालकर रखें। जब इसकी जरूरत न रहे, तो इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में फाड़कर या श्रेड करके फेंकें। मोबाइल में मौजूद डिजिटल बोर्डिंग पास को भी ठीक से डिलीट करें। तो आखिर बोर्डिंग पास को कितने समय तक संभालकर रखना सही रहता है?

