scorecardresearch

200 टन की मशीन, 308 पहिए और 14 गाड़ियों का काफिला... यूपी में क्यों चर्चा में है 'बाहुबली ट्रक'?

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर 308 पहियों वाला 'बाहुबली ट्रक' लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बेल्जियम से आया यह विशालकाय ट्रेलर अब बस्ती पहुंच चुका है। इसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि रोज सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर चलता है। जानिए इसमें क्या लदा है और कहां जा रहा है।

Advertisement

In Short

  • यूपी के बस्ती जिले पहुंचा 308 पहियों वाला 'बाहुबली ट्रक', देखने के लिए उमड़ी भारी भीड़।
  • बेल्जियम से आया 200 टन वजनी वैक्यूम वेसल, बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट में होगा इस्तेमाल।
  • रोज सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर चलता है ट्रक, रास्ता बनाने में प्रशासन को करनी पड़ रही मशक्कत।

उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर चर्चा में बना 308 पहियों वाला 'बाहुबली ट्रक' अब बस्ती जिले पहुंच गया है। इस विशालकाय ट्रक को देखने के लिए सड़कों के किनारे लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कोई इसकी तस्वीरें खींच रहा है तो कोई वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहा है। इसका आकार इतना बड़ा है कि इसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

advertisement

बेल्जियम से यूपी तक कैसे पहुंचा बाहुबली ट्रक?

इस विशालकाय मशीन का सफर बेल्जियम से शुरू हुआ था। समुद्री रास्ते से इसे ओडिशा के पारादीप पोर्ट लाया गया। इसके बाद झारखंड और बिहार होते हुए सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश पहुंचाया गया।

ट्रक के मैनेजर के मुताबिक, इस हाइड्रॉलिक मल्टी-एक्सल ट्रेलर में कुल 308 पहिए लगे हैं। इसे करीब 20 विशेष ट्रॉलियों को जोड़कर तैयार किया गया है। इस पर करीब 200 टन वजनी वैक्यूम वेसल यानी बॉयलर लदा है, जिसकी लंबाई लगभग 100 फीट और ऊंचाई 20 फीट से ज्यादा है।

कहां जाएगा ये ट्रक और क्या होगा इसका इस्तेमाल?

इस विशालकाय मशीन को बलरामपुर चीनी मिल के प्लांट ले जाया जा रहा है। वहां इसका इस्तेमाल एथेनॉल और एशिया के पहले बायोपॉलीमर यानी बायोप्लास्टिक के निर्माण में किया जाएगा।

इस ट्रेलर की खासियत इसके पहिए हैं, जिन्हें अलग-अलग दिशाओं में मोड़ा जा सकता है। इसी तकनीक की मदद से इतने बड़े ट्रक को संकरे रास्तों से सुरक्षित निकाला जा रहा है।

रोज सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर चलता है ट्रक

इस बाहुबली ट्रक की रफ्तार बेहद धीमी है। भारी वजन के कारण यह रोजाना सिर्फ 10 से 20 किलोमीटर की दूरी तय कर पाता है। रात में इसका सफर रोक दिया जाता है।

Image Credit : Aaj Tak

ट्रक में करीब 400 लीटर क्षमता का डीजल टैंक है। इसके साथ 14 गाड़ियों का काफिला चलता है, जिसमें क्रेन, हाइड्रा, जेसीबी और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम शामिल है।

रास्ता बनाने में प्रशासन को करनी पड़ रही मशक्कत

बस्ती और आसपास के इलाकों में ट्रक को निकालने के लिए प्रशासन और तकनीकी टीम को काफी मेहनत करनी पड़ रही है। रास्ते में हाई-टेंशन बिजली के तार हटाने, पेड़ों की छंटाई करने और कुछ जगह पुलों या फुट-ओवर ब्रिज के हिस्सों को अस्थायी रूप से हटाने की जरूरत पड़ रही है।

वहीं, इस ट्रक को देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। हाईवे किनारे सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर रील्स बना रहे हैं। इस अनोखे ट्रक का सफर लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है।

advertisement