Zoho में इस साल नहीं बढ़ेगी कर्मचारियों की सैलरी! श्रीधर वेम्बू ने बताई वजह, छंटनी पर भी दिया बड़ा बयान
भारतीय टेक कंपनी Zoho के कर्मचारियों के लिए इस साल सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीद खत्म हो गई है। कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने बताया कि बढ़ते AI खर्च और मुश्किल कारोबारी हालात के चलते इस बार सामान्य अप्रेजल नहीं होगा। कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की भी कोशिश कर रही है। आखिर Zoho की मुश्किलें क्यों बढ़ रही हैं और अगले कुछ साल कितने अहम होंगे? जानिए।

In Short
- Zoho में इस साल कर्मचारियों को सामान्य सैलरी हाइक नहीं मिलेगी।
- AI के बढ़ते खर्च के बीच कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी रोकने की कोशिश में।
- श्रीधर वेम्बू के मुताबिक, अगले 3 से 5 साल Zoho के लिए अहम होंगे।
भारतीय टेक कंपनी Zoho के कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) ने बताया है कि इस साल कर्मचारियों की सैलरी नहीं बढ़ाई जाएगी। AI के कारण बढ़ते खर्च और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में अनिश्चितता को देखते हुए कंपनी ने सालाना अप्रेजल रोकने का फैसला किया है। वेम्बू ने यह भी स्वीकार किया कि कंपनी मुश्किल दौर से गुजर रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वेम्बू ने बताया कि Zoho खर्च कम करने के लिए कई कदम उठा रही है। कंपनी ने अपना मार्केटिंग बजट घटाया है और कर्मचारियों को सामान्य सैलरी बढ़ोतरी नहीं दे पाने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के लिए उन्होंने कर्मचारियों से माफी भी मांगी है।

बड़े पैमाने पर छंटनी रोकने की कोशिश
श्रीधर वेम्बू के मुताबिक, सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में नौकरियों को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। Zoho बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी से बचने की पूरी कोशिश कर रही है। हालांकि, उन्होंने भविष्य में छंटनी नहीं होने की कोई गारंटी नहीं दी है।
वेम्बू ने बताया कि पिछले 18 महीनों से कंपनी ने अपने कर्मचारियों की कुल संख्या नहीं बढ़ाई है। टेक सेक्टर में पहले से ही छंटनी का दौर जारी है। Layoffs.fyi के मुताबिक, 2026 में अब तक 1.31 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं।
AI के कारण क्यों बढ़ रहा कंपनी का खर्च?
वेम्बू ने बताया कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से Zoho की लागत काफी बढ़ गई है। डेटा सेंटर के लिए जरूरी सर्वर की कीमतें करीब चार गुना हो गई हैं। इसके अलावा AI सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ने से कंपनी का खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मुश्किल वैश्विक परिस्थितियों ने भी कारोबार की चुनौतियां बढ़ाई हैं। कंपनी इन खर्चों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है। वेम्बू ने उन कर्मचारियों का धन्यवाद किया, जिन्होंने सैलरी नहीं बढ़ाने के फैसले के पीछे की परिस्थितियों को समझा है।
अगले 3 से 5 साल Zoho के लिए अहम
श्रीधर वेम्बू ने कहा कि कंपनी बदलती तकनीक और बाजार की जरूरतों के मुताबिक खुद को नए सिरे से तैयार कर रही है। हालांकि, इस बदलाव के नतीजे सामने आने में समय लग सकता है।
उनके मुताबिक, अगले तीन से पांच साल तय करेंगे कि Zoho की यह नई रणनीति कितनी सफल होती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से कंपनी की सफलता के लिए प्रार्थना करने की भी अपील की।
पहले भी महंगे AI को लेकर जताई थी चिंता
यह पहली बार नहीं है जब वेम्बू ने बढ़ती तकनीकी लागत पर चिंता जताई है। अगस्त में उन्होंने बताया था कि एक साल में मेमोरी की कीमतें 500% तक बढ़ गई थीं। AI टोकन की बढ़ती कीमतों ने भी कारोबार करना मुश्किल बना दिया है।
वेम्बू के मुताबिक, Zoho ने अब तक अपनी सेवाओं की कीमतें बढ़ाने से परहेज किया है, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च के बीच ऐसा करना मुश्किल होता जा रहा है। फिलहाल कंपनी की प्राथमिकता लागत नियंत्रित करना और बड़े पैमाने पर छंटनी से बचना है।

