
AI से खतरे में आपकी नौकरी? नोबेल विजेता ने बताया अगले 10 साल में किन कामों पर पड़ेगा असर
AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच सबसे बड़ा सवाल नौकरियों को लेकर है। क्या आने वाले वर्षों में मशीनें इंसानों की जगह ले लेंगी? नोबेल पुरस्कार विजेता डेरॉन ऐसमोग्लू ने अगले 10 साल को लेकर एक अनुमान दिया है। साथ ही बताया है कि किन कामों को AI से बदलना आसान नहीं होगा।

In Short
- नोबेल विजेता डेरॉन ऐसमोग्लू ने AI और नौकरियों के भविष्य को लेकर बड़ा अनुमान दिया है।
- उनके मुताबिक जटिल कामों में इंसानों को रिप्लेस करने में AI को अभी काफी समय लग सकता है।
- AI के आर्थिक असर और GDP में इसके संभावित योगदान को लेकर भी ऐसमोग्लू ने अपना अनुमान बताया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर लंबे समय से यह डर बना हुआ है कि आने वाले वर्षों में यह बड़े पैमाने पर इंसानों की नौकरियां छीन सकता है। लेकिन नोबेल पुरस्कार विजेता डेरॉन ऐसमोग्लू का अनुमान इससे काफी अलग है। उनका मानना है कि अगले 10 साल में AI इंसानों के किए जाने वाले कामों में से केवल 5% को ही रिप्लेस कर पाएगा।
Microsoft AI के सीईओ मुस्तफा सुलेमान ने X पर एक पोस्ट में ऐसमोग्लू के इस अनुमान को शेयर किया है। यह पोस्ट Microsoft AI की नई मैगजीन The Humanist Review के लॉन्च के दौरान किया गया। इस मैगजीन में AI के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई है।
इंसानों को रिप्लेस नहीं बल्कि बेहतर बनाए AI
डेरॉन ऐसमोग्लू ने अपने निबंध “Will AI replace workers? Not if we build it right” में कहा है कि AI को इस तरह नहीं बनाया जाना चाहिए कि वह इंसानों की जगह ले ले। इसके बजाय AI का इस्तेमाल लोगों को उनके काम में बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए।
उनके मुताबिक, मौजूदा और निकट भविष्य के AI सिस्टम की क्षमताओं को देखते हुए केवल 5% इंसानी काम AI से रिप्लेस हो सकते हैं। उनका कहना है कि AI को इंसानी बुद्धिमत्ता की नकल करने के लिए मजबूर करना एक गलती है। इंसान और AI दोनों अलग हैं, इसलिए लक्ष्य दोनों को एक साथ काम कराने का होना चाहिए।
5% का आंकड़ा सिर्फ एक अनुमान
डेरॉन ऐसमोग्लू ने साफ किया कि 5% का आंकड़ा कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि एक अनुमान है। यह मौजूदा AI क्षमताओं और 2020 के दशक के दूसरे हिस्से तक इनमें होने वाले संभावित बदलावों के आकलन पर आधारित है।
उनके मुताबिक, AI फिलहाल साधारण ऑफिस और सोच-विचार से जुड़े कुछ कामों को ऑटोमेट कर सकता है। लेकिन जटिल कामों में इंसानों की जगह लेना आसान नहीं होगा। कई नौकरियों में फैसले लेने की क्षमता, अलग-अलग पहलुओं पर सोचने और सामाजिक कौशल की जरूरत होती है।

मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन में लगेगा ज्यादा समय
डेरॉन ऐसमोग्लू का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी नौकरियों को ऑटोमेट करने में ज्यादा समय लग सकता है। इसकी वजह रोबोटिक्स की मौजूदा सीमाएं और जगह व कारणों के बीच संबंधों को समझने में AI की सीमित क्षमता है।
GDP में 10 साल में 1.5% का योगदान
डेरॉन ऐसमोग्लू के मुताबिक, AI से अभी तक उत्पादकता में कोई बड़ा और साफ तौर पर मापने योग्य उछाल नहीं दिखा है। ज्यादातर कंपनियां अभी इस टेक्नोलॉजी के साथ प्रयोग कर रही हैं और उन्हें वास्तविक स्तर पर बड़ा फायदा नहीं मिल रहा है।
उनका अनुमान है कि AI अगले 10 साल में जीडीपी में करीब 1.5% जोड़ सकता है। यानी इससे तुरंत किसी बड़ी आर्थिक क्रांति की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। कंपनियों को AI के हिसाब से अपने काम करने के तरीके, टीमों और बिजनेस प्रोसेस को बदलने में भी समय लगेगा।

