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ट्रंप-शी की मुलाकात में AI बना सबसे बड़ा मुद्दा, सुपरइंटेलिजेंस और टेक रेस पर हुई अहम चर्चा

अमेरिका और चीन के बीच AI की रेस अब वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गई है। ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में सुपरइंटेलिजेंस, AI सुरक्षा और तकनीक के भविष्य पर बात हुई। दोनों देश AI में बढ़त चाहते हैं, लेकिन इसके इस्तेमाल और नियंत्रण को लेकर उनकी प्राथमिकताएं अलग हैं।

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In Short

  • ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में AI और सुपरइंटेलिजेंस प्रमुख मुद्दा रहे, दोनों देशों ने तकनीक के भविष्य पर चर्चा की।
  • अमेरिका AI में अपनी बढ़त बनाए रखने पर जोर दे रहा है, जबकि चीन ने AI को इंसानों के नियंत्रण में रखने की बात कही।
  • AI रेस में सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, AI मॉडल और एडवांस टेक्नोलॉजी को लेकर अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर से पहले बातचीत के दौरान सकारात्मक माहौल दिखाया। हालांकि, दोनों देशों के बीच ट्रेड, ताइवान, एडवांस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।

इस बैठक में AI एक अहम विषय बनकर सामने आया। ट्रंप ने कहा कि “सुपरइंटेलिजेंस” बातचीत का बड़ा हिस्सा होगा, जबकि शी जिनपिंग ने कहा कि AI का विकास इंसानों के नियंत्रण में रहना चाहिए।

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AI में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा

ट्रंप लगातार AI को अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के तौर पर पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि AI में अमेरिका की बढ़त बनाए रखना आर्थिक और राष्ट्रीय शक्ति के लिए जरूरी है।

अमेरिकी प्रशासन AI विकास की रफ्तार को धीमा नहीं करना चाहता, लेकिन साथ ही चीन के साथ AI से जुड़े मामलों पर सीमित सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रहा है। इसमें AI संवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े AI घटनाक्रमों की जानकारी साझा करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

शी जिनपिंग ने AI के जिम्मेदार इस्तेमाल पर दिया जोर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने AI के विकास को “अच्छे उद्देश्य” के लिए इस्तेमाल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे प्रमुख AI देश यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी रखते हैं कि यह तकनीक इंसानों के नियंत्रण में रहे।

शी ने AI गवर्नेंस को दोनों देशों के बीच संबंधों को जिम्मेदारी से संभालने की जरूरत से भी जोड़ा।

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उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा सीमित दायरे में रहनी चाहिए और दोनों देशों को शांतिपूर्ण तरीके से साथ रहने के लिए संवाद बनाए रखना चाहिए।

सैन्य संवाद और तनाव कम करने की अपील

शी जिनपिंग ने अमेरिका और चीन की सेनाओं के बीच बेहतर संवाद की जरूरत बताई, ताकि किसी भी मतभेद को बड़े विवाद में बदलने से रोका जा सके।

उन्होंने तथाकथित “थ्यूसीडाइड्स ट्रैप” का भी जिक्र किया, जिसमें एक स्थापित शक्ति और उभरती शक्ति के बीच टकराव की संभावना की बात कही जाती है। शी ने कहा कि बातचीत और संकट प्रबंधन के जरिए ऐसी स्थिति से बचा जा सकता है।

ट्रेड और टेक्नोलॉजी भी चर्चा में रहे

ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ अपने संबंधों को मजबूत बताते हुए ट्रेड पर हुई प्रगति का जिक्र किया। उन्होंने बाजार पहुंच और अमेरिकी कृषि उत्पादों के निर्यात जैसे मुद्दों पर भी बात की।

हालांकि, दोनों देशों के बीच टैरिफ, सेमीकंडक्टर नियंत्रण, दुर्लभ खनिजों की सप्लाई, ताइवान और टेक्नोलॉजी को लेकर मतभेद जारी हैं।

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AI रेस में शामिल हुए बड़े टेक दिग्गज

व्हाइट हाउस डिनर में कई बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए, जिससे AI की बढ़ती अहमियत साफ दिखाई दी।

इस कार्यक्रम में OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग, Tesla और SpaceX के CEO एलन मस्क, Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस, Google के CEO सुंदर पिचाई और Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग जैसे टेक लीडर्स मौजूद थे।

अमेरिका और चीन के बीच AI प्रतिस्पर्धा सिर्फ चैटबॉट तक सीमित नहीं है। दोनों देश एडवांस सेमीकंडक्टर, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, AI मॉडल, डेटा सेंटर, सप्लाई चेन और सैन्य उपयोग से जुड़ी तकनीकों में आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं।