डेरिवेटिव्स पर सख्ती का दौर खत्म, NSE फिर बढ़ा रहा ऑप्शंस में बाजार हिस्सा
आशीष कुमार चौहान ने ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कहा कि डेरिवेटिव्स पर सख्ती का चक्र मोटे तौर पर पूरा हो चुका है। उनका यह बयान NSE के शेयरों की लिस्टिंग के एक दिन बाद आया है। इसके साथ ही एक्सचेंज की करीब एक दशक लंबी लिस्टेड कंपनी बनने की प्रक्रिया पूरी हुई है।

भारत के डेरिवेटिव्स बाजार में नियामकीय सख्ती का दौर अब बड़े स्तर पर खत्म हो चुका है। ब्लूमबर्ग के रिपोर्ट के मुताबिक देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE के सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा कि सख्त नियमों के बाद ट्रेडर्स अब नए माहौल के हिसाब से ढल रहे हैं और इक्विटी ऑप्शंस में NSE अपनी बाजार हिस्सेदारी वापस हासिल कर रहा है।
आशीष कुमार चौहान ने ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कहा कि डेरिवेटिव्स पर सख्ती का चक्र मोटे तौर पर पूरा हो चुका है। उनका यह बयान NSE के शेयरों की लिस्टिंग के एक दिन बाद आया है। इसके साथ ही एक्सचेंज की करीब एक दशक लंबी लिस्टेड कंपनी बनने की प्रक्रिया पूरी हुई है।
ऑप्शंस कारोबार पर दबाव
पिछले साल एनएसई की Jane Street Group पर कार्रवाई और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने वाले दूसरे कदमों से भारत का डेरिवेटिव्स बाजार ठंडा पड़ा है। इससे NSE के कारोबार और वैल्यूएशन पर भी असर पड़ा।
अगस्त में NSE पर फ्यूचर्स और ऑप्शंस का औसत डेली नॉशनल टर्नओवर जुलाई के मुकाबले 10% घटकर 193 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह फरवरी 2025 के बाद सबसे निचला स्तर था। BSE पर भी यह कारोबार 34% घटकर 154 लाख करोड़ रुपये रहा।
इसके बावजूद इक्विटी ऑप्शंस NSE के लिए अहम बने हुए हैं। चौहान के मुताबिक, साप्ताहिक इक्विटी ऑप्शंस अभी भी एक्सचेंज के करीब 40% राजस्व में योगदान देते हैं।
कमोडिटी में विस्तार पर जोर
NSE अब कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भी कारोबार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। एक्सचेंज पर क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट पहले से उपलब्ध हैं। साथ ही, NSE नियामक के साथ बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर भी काम कर रहा है।
कमोडिटी बाजार के लिए विदेशी निवेशकों की बढ़ती पहुंच NSE के लिए नया मौका बन सकती है। सेबी ने बीते गुरुवार को विदेशी निवेशकों को गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स के व्यापक दायरे में कारोबार की अनुमति दी।
