scorecardresearch

सिर्फ 4 मिनट में चार्ज हो सकती है नई Sodium Metal Battery, जानिए क्यों हो रही है इसकी चर्चा

बार-बार लंबा इंतजार करके फोन या इलेक्ट्रिक कार चार्ज करने की परेशानी भविष्य में खत्म हो सकती है। वैज्ञानिकों ने ऐसी बैटरी तैयार करने का दावा किया है, जो कुछ ही मिनटों में चार्ज हो जाती है। जानिए यह तकनीक कैसे काम करती है और इसकी सबसे बड़ी खासियत क्या है।

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • चीन के वैज्ञानिकों ने 4 मिनट में चार्ज होने वाली Sodium Metal Battery का दावा किया है।
  • नई बैटरी में लिथियम की जगह सोडियम का इस्तेमाल किया गया है, जिसे कम लागत वाला विकल्प माना जा रहा है।
  • फिलहाल यह तकनीक रिसर्च स्टेज में है और बाजार में आने से पहले कई परीक्षण बाकी हैं।

Four Minute Charging Battery: अगर भविष्य में आपका स्मार्टफोन, लैपटॉप या इलेक्ट्रिक कार कुछ ही मिनटों में पूरी तरह चार्ज हो जाए तो यह किसी बड़े बदलाव से कम नहीं होगा। चीन के वैज्ञानिकों ने ऐसी ही एक नई सोडियम मेटल बैटरी विकसित करने का दावा किया है, जो सिर्फ 4 मिनट में चार्ज हो सकती है। रिसर्च में यह भी कहा गया है कि यह बैटरी लंबे समय तक अपनी क्षमता बनाए रखने में सक्षम है। हालांकि, यह तकनीक अभी रिसर्च के दौर में है और बाजार तक पहुंचने में समय लगेगा।

advertisement

क्या है नई Sodium Metal Battery?

इस समय ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और इलेक्ट्रिक कारों में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन लिथियम महंगा है और इसकी उपलब्धता भी सीमित देशों तक है। इसी वजह से वैज्ञानिक लंबे समय से दूसरे विकल्पों पर काम कर रहे हैं।

नई बैटरी में लिथियम की जगह सोडियम का इस्तेमाल किया गया है। सोडियम आसानी से उपलब्ध होता है और इसकी लागत भी कम मानी जाती है। इसी कारण इसे भविष्य की बैटरी तकनीक के रूप में देखा जा रहा है।

4 मिनट में चार्ज होने का दावा

रिसर्च के अनुसार, यह नई बैटरी केवल 4 मिनट में चार्ज हो सकती है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक खास Quasi-Solid Gel Electrolyte तैयार किया है। यह तकनीक बैटरी के अंदर बनने वाले डेंड्राइट्स को बनने से रोकती है।

ये खबर पढ़ना ना भूलें: iPhone यूजर्स के लिए आया iOS 27 Public Beta, इंस्टॉल करने से पहले जानें जरूरी बातें

डेंड्राइट्स ऐसे धातु के छोटे और नुकीले हिस्से होते हैं, जो बैटरी में शॉर्ट सर्किट की वजह बन सकते हैं। नई तकनीक इनकी समस्या को कम करने का दावा करती है, जिससे बैटरी तेज चार्ज होने के साथ अधिक सुरक्षित भी बनती है।

लंबे समय तक बनी रही क्षमता

रिसर्च में यह भी बताया गया है कि लैब टेस्ट के दौरान बैटरी ने हजारों घंटे तक बिना शॉर्ट सर्किट के काम किया। वहीं 20 मिनट के चार्जिंग टेस्ट में करीब 2,000 चार्ज साइकिल के बाद भी इसकी लगभग 90 प्रतिशत क्षमता बनी रही।

क्या लिथियम बैटरी की जगह ले पाएगी?

फिलहाल इस सवाल का जवाब 'नहीं' है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है। बड़े स्तर पर उत्पादन, अलग-अलग मौसम में परीक्षण और व्यावसायिक इस्तेमाल से पहले इसे कई और टेस्ट से गुजरना होगा।

इसके अलावा, सोडियम मेटल बैटरी की ऊर्जा संग्रह करने की क्षमता अभी लिथियम-आयन बैटरी से कम है। इसलिए फिलहाल इसे स्मार्टफोन और लंबी दूरी तय करने वाली इलेक्ट्रिक कारों में सीधे विकल्प के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

advertisement

क्यों खास मानी जा रही है यह तकनीक?

इस नई बैटरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज चार्जिंग, कम लागत और बेहतर सुरक्षा मानी जा रही है। चूंकि सोडियम आसानी से उपलब्ध है, इसलिए भविष्य में इसकी लागत कम हो सकती है। साथ ही, सोडियम आधारित बैटरियों में आग लगने का खतरा भी लिथियम बैटरियों के मुकाबले कम माना जाता है।

फिलहाल यह तकनीक रिसर्च तक सीमित है, लेकिन आगे के परीक्षण सफल रहने पर आने वाले सालों में इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक कारों, ग्रिड एनर्जी स्टोरेज और दूसरे क्षेत्रों में किया जा सकता है।