भारत की बढ़ती हुई एआई क्षमता पर विश्वास जताते हुए अंबानी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत दुनिया के सबसे बड़े एआई पावर्स में से एक बनेगा। दूसरा कोई देश भारत के लोकतंत्र, डेमोग्राफी, विकास, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उसकी डेटा जनरेशन और एआई कैपेसिटी की बराबरी नहीं कर पाएगा।
मोबाइल इंटरनेट की तरह AI को भी सस्ता बनाने की तैयारी में मुकेश अंबानी! बताया ये बड़ा प्लान
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने आज एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बोलते हुए तीन बड़ी घोषणाएं कीं, जो न सिर्फ उनकी कंपनी बल्कि देश में एआई के लिए काफी जरूरी हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने आज एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बोलते हुए तीन बड़ी घोषणाएं कीं, जो न सिर्फ उनकी कंपनी बल्कि देश में एआई के लिए काफी जरूरी हैं। चलिए जानते हैं मुकेश अंबानी ने क्या-क्या कहा है।
1. भारत को एआई से जोड़ेगा जियो
भारत के आम लोगों को मोबाइल इंटरनेट से जोड़ने में जियो ने एक बहुत बड़ा रोल निभाया था। उसी तरह अब जियो भारत को न्यू इंटेलिजेंस एरा को करीब लाएगा।
अपने भाषण में अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी एआई को हर नागरिक, हर एक इकोनॉमिक सेक्टर और सामाजिक विकास के करीब ले जाएगी। इस काम को करने के लिए जियो अपनी क्वालिटी, स्केल, अपने कम दाम और अपनी विश्वसनीयता का इस्तेमाल करेगा, जिसकी मदद से उसने पहले देश में कनेक्टिविटी को आसान बनाया था। जैसे जियो ने डेटा की कीमतों में कमी लाई थी, वैसे ही आज जियो एआई को सभी के लिए अफोर्डेबल बनाने पर काम करेगा।
2. होगा भारी भरकम निवेश
देश में एआई को अफोर्डेबल बनाने के लिए जियो एआई सेक्टर में भारी निवेश करेगा। इसके लिए अगले सात सालों में जियो और रिलायंस मिलकर 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करेंगे।
3. लाएंगे अपना Sovereign Compute Infrastructure
सॉवरिन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर (Sovereign Compute Infrastructure) उन सभी अलग-अलग टेक्नोलॉजी के ग्रुप को कहा जाता है, जिससे एक देश को अपने डेटा, हार्डवेयर और एआई क्षमता पर पूरा कंट्रोल मिलता है।
यह एक तरह का स्वदेशी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर होता है। जियो इंटेलिजेंस भारत का खुद का सॉवरिन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलप करेगा। इस इंफ्रास्ट्रक्चर को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा:
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सबसे पहले गीगावाट डेटा सेंटर बनाए जाएंगे। इसके लिए कंपनी ने पहले ही जमनगर में एल-मल्टी गीगावाट एआई-रेडी डेटा सेंटर का कंस्ट्रक्शन शुरू कर दिया है। 120 मेगावाट की क्षमता इस साल के अंत तक हासिल कर ली जाएगी, जिससे बड़े स्केल पर काम किया जा सकेगा।
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जियो बड़े स्तर पर ग्रीन एनर्जी का उपयोग करेगा, जिसकी मदद से वह 10 गीगावाट ग्रीन एनर्जी जेनरेट और स्टोर करेगा। इसके लिए कच्छ और आंध्र प्रदेश के जरिए सोलर पावर को जेनरेट और इस्तेमाल किया जाएगा।
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नेशनवाइड एज कंप्यूट (Edge Compute) - एज कंप्यूट की मदद से जियो का नेटवर्क अपने इंटेलिजेंस सर्विस को हर नागरिक और उनकी जरूरतों के हिसाब से ज्यादा अफोर्डेबल और रिस्पॉन्सिव बना पाएगा। इससे डेटा को लोकली आपके फोन में स्टोर किया जा सकेगा, जिसकी मदद से सिस्टम आसानी से काम करेगा और लोगों का डेटा सुरक्षित भी रहेगा।
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