Semiconductor में भारत के लिए कहां है बड़ा मौका? राजीव चंद्रशेखर ने बताया अगला रास्ता
भारत Semiconductor के क्षेत्र में बड़े निवेश के साथ आगे बढ़ रहा है, लेकिन राजीव चंद्रशेखर का मानना है कि केवल Chip Assembly और Packaging पर ध्यान देना काफी नहीं होगा। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उन्होंने Chip Design, Research और Manufacturing पर जोर दिया है। साथ ही बताया कि भारत किस क्षेत्र में बड़ा मौका हासिल कर सकता है।

In Short
- राजीव चंद्रशेखर ने भारत को सामान्य Chip Packaging से आगे बढ़ने की जरूरत बताई है।
- उनके मुताबिक भारत में करीब 1.25 लाख Chip Design Engineers मौजूद हैं।
- - उन्होंने ₹1,000 करोड़ का Chip Design Commercialisation Fund बनाने का सुझाव दिया है।
भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। इस बीच BJP नेता और पूर्व इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा है कि भारत को केवल चिप जोड़ने और उसकी पैकेजिंग करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
उनका कहना है कि अब देश को चिप डिजाइन, बेहतर पैकेजिंग, चिप बनाने और रिसर्च जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण दुनिया की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री बदल रही है और भारत के लिए इसमें बड़ा मौका बन सकता है।
सेमीकंडक्टर मिशन में अब तक कितना काम हुआ है?
राजीव चंद्रशेखर के मुताबिक भारत का सेमीकंडक्टर कार्यक्रम ने अब तक अच्छी प्रगति की है। देश में 12 चिप बनाने वाली इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इनमें करीब ₹1.64 लाख करोड़ के निवेश का वादा किया गया है।
उनके मुताबिक इनमें से पांच इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है। इसके बाद आई India Semiconductor Mission 2.0 में भी करीब ₹1.275 लाख करोड़ का निवेश शामिल है।
हालांकि उनका कहना है कि सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि कितना पैसा निवेश हो रहा है। यह देखना भी जरूरी है कि यह पैसा किस तरह की तकनीक तैयार करने में लगाया जा रहा है।
सिर्फ चिप पैकेजिंग काफी नहीं
चंद्रशेखर के मुताबिक मंजूर की गई 12 इकाइयों में से नौ सामान्य ATMP या OSAT इकाइयां हैं। इनमें मुख्य रूप से चिप को जोड़ने, जांच करने, उस पर निशान लगाने और पैकेजिंग का काम किया जाता है।
उनका कहना है कि सेमीकंडक्टर कारोबार में इस तरह के काम से कम कमाई होती है और इसमें मुकाबला भी ज्यादा है।
इसलिए भारत को अपनी चिप डिजाइन करने, नई तकनीक तैयार करने, बेहतर पैकेजिंग और देश में ही चिप बनाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
AI से बदल रहा चिप का बाजार
चंद्रशेखर ने कहा कि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने के मामले में China Plus One रणनीति का फायदा मिला है। उनके मुताबिक दुनिया में बनने वाले करीब 25 से 28% iPhone अब भारत में जोड़े जाते हैं।
लेकिन सेमीकंडक्टर के मामले में स्थिति अलग है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण अब नए और ज्यादा ताकतवर chips की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने Nvidia के Data Centre कारोबार में हुई तेज बढ़ोतरी का उदाहरण देते हुए कहा कि AI Chips आने वाले समय में भारत के लिए बड़ा मौका बन सकते हैं।
AI Inference में भारत के लिए बड़ा मौका
राजीव चंद्रशेखर ने AI Inference को भारत के लिए खास मौका बताया है। आसान भाषा में समझें तो AI Model को तैयार करने के बाद उससे सवालों के जवाब लेने या किसी काम के लिए इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को AI Inference कहा जाता है।
उनका कहना है कि Cloud, Defence, Agriculture, Factories और अलग-अलग Devices में AI का इस्तेमाल बढ़ने से अलग-अलग तरह के Chips की जरूरत होगी।
भारत इस जरूरत के हिसाब से खास Chips बनाकर इस बाजार में अपनी जगह मजबूत कर सकता है।
भारत के पास 1.25 लाख Chip Design Engineers
चंद्रशेखर के मुताबिक भारत में करीब 1.25 लाख Chip Design Engineers हैं। देश Open Source RISC-V Technology और DIR-V Programme की मदद से अलग-अलग जरूरतों के लिए अपने Chips तैयार कर सकता है।
इससे भारत को विदेशी Chip Technology पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
रिसर्च के लिए अलग संस्थान बनाने का सुझाव
चंद्रशेखर ने एक National Semiconductor Research Institute बनाने का सुझाव भी दिया है। यह संस्थान नई Chip Technology तैयार करने, Chip Design और इस क्षेत्र के लिए कुशल लोगों को तैयार करने पर काम कर सकता है।
इसके अलावा उन्होंने ₹1,000 करोड़ का Chip Design Commercialisation Fund बनाने की बात कही है। इस रकम का इस्तेमाल भारतीय कंपनियों को अपने डिजाइन किए गए Chips को बाजार तक पहुंचाने में मदद देने के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कम से कम दो सरकारी AI Inference Chip Programmes शुरू करने का सुझाव भी दिया है।
चंद्रशेखर का कहना है कि भारत को अब केवल ज्यादा सेमीकंडक्टर इकाइयां लगाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए। अगला लक्ष्य देश में अपनी Chip Technology, Design और Research की क्षमता को मजबूत करना होना चाहिए।

