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India AI Impact Summit 2026: भारत में एआई कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए योट्टा और एनविडिया की बड़ी तैयारी

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के इंडस्ट्री सेशन में बोलते हुए योट्टा डेटा सर्विसेज के सीईओ सुनील गुप्ता  ने कहा कि आने वाले दिनों में उनकी कंपनी और एनविडिया मिलकर कई बड़े ऐलान करने वाली हैं। ये घोषणाएं खास तौर पर भारत में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) कैपेसिटी को कई गुना बढ़ाने से जुड़ी होंगी।

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आज दुनिया भर में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। इसी बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए योट्टा डेटा सर्विसेज (Yotta Data Services) और अमेरिकी चिप निर्माता एनविडिया (Nvidia) ने घोषणा की है कि जल्द ही भारत की AI कंप्यूटिंग कैपेसिटी में बड़ा विस्तार किया जाएगा।

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इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के इंडस्ट्री सेशन में बोलते हुए योट्टा डेटा सर्विसेज के सीईओ सुनील गुप्ता  ने कहा कि आने वाले दिनों में उनकी कंपनी और एनविडिया मिलकर कई बड़े ऐलान करने वाली हैं। ये घोषणाएं खास तौर पर भारत में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) कैपेसिटी को कई गुना बढ़ाने से जुड़ी होंगी।

क्या है जीपीयू?

ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) एक खास प्रकार का हार्डवेयर होता है, जो एडवांस्ड AI मॉडल्स को ट्रेन करने और चलाने के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। अमेरिकी कंपनी एनविडिया जीपीयू चिप सेक्टर की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। भारत भी ऐसे चिप्स को देश में ही बनाने का प्रयास कर रहा है, ताकि स्वदेशी एआई क्षमता को मजबूत किया जा सके।

पिछले दो साल में योट्टा पहले ही 10 हजार से ज्यादा जीपीयू चिप्स डिप्लॉय कर चुका है और आगे भी अपनी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है, जिससे देश में एआई टेक्नोलॉजी को अपनाने में किसी तरह की देरी न हो।

कंपनी की ये योजनाएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब भारत खुद को ग्लोबल AI हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज सरकार और निजी कंपनियां दोनों डेटा सेंटर्स और एआई टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश बढ़ा रही हैं।

मोबाइल कनेक्टिविटी और डिजिटल पेमेंट्स का उदाहरण देते हुए  गुप्ता  ने कहा कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी की लागत कम होती है और सेवाएं मैच्योर होती हैं, वैसे-वैसे ज्यादा लोग उसे अपनाने लगते हैं। जब ग्राहकों को कम कीमत में बेहतर आउटपुट मिलता है, तब टेक्नोलॉजी का बड़े स्तर पर इस्तेमाल शुरू हो जाता है।

भारत में एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए इसकी मांग में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसका सीधा असर डेटा प्रोसेसिंग और बिजली की मांग पर पड़ेगा। इसी ओर इशारा करते हुए गुप्ता कहते है  कि डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ाना अब बेहद जरूरी हो गया है।

सरकार और निजी उद्योग दोनों ही डेटा सेंटर्स और AI इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश बढ़ा रहे हैं और माना जा रहा है कि अगले दो वर्षों के भीतर भारत में कंप्यूट उपलब्धता अब बड़ी समस्या नहीं रहेगी।