
गूगल और सेबी ने मिलाया हाथ! प्ले स्टोर पर असली ब्रोकिंग ऐप्स को मिला 'Verified' बैज - ऐसे करें पहचान
सेबी और गूगल ने निवेश ऐप्स पर Verified बैज शुरू किया है। इससे असली और फर्जी ऐप्स की पहचान आसान होगी। 600+ ऐप्स को बैज मिल चुका है। इसका उद्देश्य ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी रोकना और निवेशकों को सुरक्षित प्लेटफॉर्म देना है।

In Short
- सेबी और गूगल ने निवेश ऐप्स के लिए Verified बैज लॉन्च किया
- 600+ स्टॉक ब्रोकिंग ऐप्स को मिला बैज, आगे अन्य रजिस्टर्ड संस्थानों को भी शामिल किया जाएगा
- फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम
ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए सेबी (SEBI) और गूगल ने हाथ मिलाया है। अब गूगल प्ले स्टोर पर आपको निवेश से जुड़े ऐप्स पर एक 'वेरिफाइड' (Verified) बैज या लेबल दिखाई देगा।
इसका सीधा मकसद असली और नकली ऐप्स के बीच के फर्क को खत्म करना है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने इस पहल पर जोर देते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य नुकसान होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, नुकसान होने से पहले ही सुरक्षा कवच तैयार करना है।
कैसे काम करेगा यह नया सुरक्षा घेरा?
इस नई व्यवस्था के तहत केवल उन्हीं ऐप्स को 'Verified' का निशान मिलेगा जो सेबी के साथ रजिस्टर्ड हैं। इसकी शुरुआत स्टॉक ब्रोकर्स के साथ की गई है। गूगल का यह सिस्टम सीधे सेबी के डेटाबेस से जुड़ा है, जिससे यह पक्का हो जाता है कि ऐप चलाने वाली कंपनी के पास जरूरी लाइसेंस है।

फिलहाल 600 से ज्यादा स्टॉक ब्रोकिंग ऐप्स को यह बैज दिया जा चुका है। आने वाले समय में इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और पोर्टफोलियो मैनेजर जैसे अन्य रजिस्टर्ड संस्थानों के ऐप्स को भी इस दायरे में लाया जाएगा।
फर्जी ऐप्स पर नकेल कसना क्यों जरूरी?
भारत में पिछले कुछ समय में फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स और सोशल मीडिया के जरिए ऊंचे रिटर्न का लालच देने वाले स्कैम तेजी से बढ़े हैं। जालसाज अक्सर जाने-माने ब्रांड्स के मिलते-जुलते नाम वाले नकली ऐप बनाकर लोगों को ठगते हैं।
सेबी ने बताया कि उसने अब तक 1.3 लाख से ज्यादा भ्रामक विज्ञापनों और कंटेंट को हटाने के निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं, करीब 66 फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स को ऐप स्टोर्स से हटवाया भी गया है। अब इस नए सिस्टम के बाद सिर्फ वेरिफाइड कंपनियां ही गूगल और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अपने विज्ञापन चला सकेंगी।
निवेशकों के लिए सावधानी के मंत्र
भले ही गूगल ने अब पहचान आसान कर दी है, लेकिन सेबी ने निवेशकों को 'पहले जांचें, फिर निवेश करें' की सलाह दी है। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसका वेरिफिकेशन बैज जरूर देखें और कंपनी के रजिस्ट्रेशन नंबर का मिलान सेबी की आधिकारिक वेबसाइट से करें। रेगुलेटर का मानना है कि तकनीक और सावधानी के मेल से ही डिजिटल ठगी पर लगाम लगाई जा सकती है।

