इंटरनेट की सुरक्षा में ऐसी चूक कि Google और Apple को लेना पड़ा तुरंत एक्शन! eMudhra के 8 सर्टिफिकेट ब्लॉक
इंटरनेट पर सुरक्षित मानी जाने वाली वेबसाइटों की पहचान से जुड़ी एक ऐसी खामी सामने आई है, जिसने टेक कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय कंपनी eMudhra के आठ डिजिटल सर्टिफिकेट में बेहद कमजोर सिक्योरिटी की मिलने के बाद Google और Apple समेत कई कंपनियों ने तत्काल कदम उठाए हैं। जानिए इससे इंटरनेट यूजर्स को क्या खतरा था और बचाव के लिए क्या करना जरूरी है।

In Short
- eMudhra के 8 डिजिटल सर्टिफिकेट में बेहद कमजोर सिक्योरिटी की मिलीं।
- Google, Apple और Mozilla ने प्रभावित सर्टिफिकेट ब्लॉक किए।
- - यूजर्स को ब्राउजर और डिवाइस अपडेट रखने की सलाह। 5. SEO Keywords
इंटरनेट पर वेबसाइटों की सुरक्षा से जुड़ी एक गंभीर खामी सामने आई है। भारतीय डिजिटल सर्टिफिकेट जारी करने वाली कंपनी eMudhra के आठ इंटरमीडिएट सर्टिफिकेट में बेहद कमजोर सिक्योरिटी की (Security Keys) पाई गई हैं। इसके बाद Google, Apple और Mozilla जैसी कंपनियों ने तुरंत कदम उठाते हुए इन सर्टिफिकेट को ब्लॉक कर दिया है। इस खामी से फर्जी वेबसाइट सर्टिफिकेट बनाए जाने का खतरा था।
कैसे सामने आई सिक्योरिटी में खामी?
17 अक्टूबर को Wayne नाम के एक सिक्योरिटी रिसर्चर ने टेक कंपनियों को इस समस्या की जानकारी दी।
रिसर्चर ने कमजोर सिक्योरिटी की को क्रैक करने का दावा साबित करने के लिए एक वेबसाइट बनाई और उस पर डिजिटल हस्ताक्षर वाला मैसेज पोस्ट किया।
दरअसल, डिजिटल सर्टिफिकेट किसी वेबसाइट की पहचान साबित करने में मदद करता है। अगर उसकी निजी सिक्योरिटी की कमजोर हो, तो साइबर अपराधी नकली सर्टिफिकेट बनाकर किसी वेबसाइट को असली दिखाने की कोशिश कर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाली मजबूत की में करीब 384 बिट की सुरक्षा होती है, जबकि इन सर्टिफिकेट की प्रभावी सुरक्षा केवल 3 से 8 बिट बताई गई।
Google और Apple ने क्या कदम उठाए?
मामला सामने आने के बाद Google, Apple और Mozilla ने प्रभावित सर्टिफिकेट को अपने Chrome, Safari और Firefox ब्राउजर में ब्लॉक कर दिया।
Cloudflare ने भी अपने नेटवर्क और 1.1.1.1 WARP ऐप के लिए इमरजेंसी सुरक्षा अपडेट जारी किए।
वहीं, Go प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के डेवलपर्स ने प्रभावित की को अस्वीकार करने के लिए नए सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किए हैं।
क्या यह खामी Heartbleed से भी गंभीर है?
Go के इंजीनियर Filippo Valsorda ने चेतावनी दी है कि इस समस्या को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल हो सकता है।
उनके मुताबिक, ब्राउजर को अपडेट करना आसान है, लेकिन पुराने Linux सिस्टम, स्मार्ट डिवाइस और सर्वर टूल्स में जरूरी बदलाव करने में लंबा समय लग सकता है।
उन्होंने इसकी तुलना 2014 के चर्चित Heartbleed सिक्योरिटी बग से भी की है।
क्या आम इंटरनेट यूजर्स को खतरा है?
फिलहाल सर्टिफिकेट ट्रांसपेरेंसी लॉग में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि इन कमजोर की का इस्तेमाल करके दुर्भावनापूर्ण सर्टिफिकेट जारी किए गए हों। हालांकि, इससे हर तरह के संभावित दुरुपयोग की आशंका पूरी तरह खत्म नहीं होती।
इस खामी का फायदा उठाने के लिए आम तौर पर हमलावर को यूजर और वेबसाइट के बीच इंटरनेट कनेक्शन में दखल देने की स्थिति में होना पड़ेगा।
यूजर्स को क्या करना चाहिए? अपने Chrome, Safari या Firefox ब्राउजर, स्मार्टफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम और इंटरनेट सिक्योरिटी ऐप्स को अपडेट रखें। इससे कंपनियों की ओर से जारी किए गए सुरक्षा सुधार आपके डिवाइस तक पहुंच सकेंगे।

