1 अप्रैल 2026 से शेयर बाजार में लागू होंगे ये नए नियम! निवेशक से लेकर ट्रेडर्स तक, जानिए क्या पड़ेगा प्रभाव
1 अप्रैल से नया टैक्स कानून लागू होगा, जिससे टैक्स सिस्टम आसान होगा और FY-AY की दोहरी व्यवस्था खत्म होगी। F&O ट्रेडिंग पर टैक्स बढ़ेगा, बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा और डिविडेंड/MF इनकम पर छूट खत्म होगी। साथ ही SEBI के नए नियम और ब्रोकरेज बदलाव भी लागू होंगे।

कल यानी बुधवार 1 अप्रैल से नया फाइनेंशियल ईयर या वित्त वर्ष शुरू होने जा रहा है। ऐसे में 1 अप्रैल से काफी कुछ बदलने वाला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के बाद अब इनकम टैक्स एक्ट 2025 1 अप्रैल से लागू हो जाएगा, जो मौजूदा 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। नए कानून में टैक्स स्लैब और दरें भले नहीं बदलीं, लेकिन टैक्स गणना और सिस्टम को काफी आसान और आधुनिक बनाया गया है।
F&O ट्रेडिंग पर बढ़ा टैक्स बोझ
डेरिवेटिव ट्रेडर्स के लिए 1 अप्रैल से बड़ा बदलाव लागू हो रहा है। फ्यूचर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। ऑप्शंस प्रीमियम पर टैक्स 0.10% से बढ़कर 0.15% और एक्सरसाइज पर 0.125% से बढ़कर 0.15% हो गया है। यह बदलाव केवल F&O ट्रेडिंग पर लागू होगा।
बायबैक पर अब कैपिटल गेन टैक्स
अब शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को ‘कैपिटल गेन’ के तहत टैक्स किया जाएगा। पहले इसे डिविडेंड इनकम माना जाता था। नए नियम के तहत व्यक्तिगत प्रमोटर्स पर 30% और कंपनियों पर 22% टैक्स लगेगा।
डिविडेंड और MF निवेशकों के लिए झटका
डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से कमाई अब 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' में आएगी। पहले जहां 20% तक ब्याज कटौती का फायदा मिलता था, अब यह पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इससे निवेशकों की टैक्स प्लानिंग पर असर पड़ेगा।
SEBI के नए मार्जिन नियम लागू
रेगुलेटरी मोर्चे पर Securities and Exchange Board of India ने F&O ट्रेडर्स के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब कुल कोलैटरल का कम से कम 50% कैश या कैश इक्विवेलेंट में रखना अनिवार्य होगा।
ब्रोकरेज महंगा, सेटलमेंट में देरी
1 अप्रैल से ब्रोकरेज इंडस्ट्री में भी बदलाव दिखेगा। Zerodha जैसे प्लेटफॉर्म इंट्राडे डेरिवेटिव ट्रेड्स पर फीस बढ़ाने की तैयारी में हैं। साथ ही 1 अप्रैल को सेटलमेंट हॉलिडे होने के कारण 2 अप्रैल तक ट्रेडिंग फंड्स का इस्तेमाल या निकासी संभव नहीं होगी।
खत्म हुआ FY और AY का झंझट
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब फाइनेंशियल ईयर (FY) और असेसमेंट ईयर (AY) की दोहरी व्यवस्था खत्म कर दी गई है। 1 अप्रैल से कमाई गई आय सीधे एक ही 'टैक्स ईयर' में गिनी जाएगी, जिससे टैक्स फाइलिंग पहले से ज्यादा सरल हो जाएगी।

