RBI का शेयर स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं, फिर वह सरकार को कैसे देगी डिविडेंड और कैसे होगा इसका कैलकुलेशन?
एक बड़ा सवाल उठता है कि जब RBI शेयर मार्केट में लिस्टेड ही नहीं है, तो वह सरकार को डिविडेंड कैसे देता है और इसका कैलकुलेशन कैसे होता है? चलिए आसान भाषा में समझते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड (सरप्लस ट्रांसफर) देने की तैयारी में है। बिजनेस टुडे के मुताबिक आगामी शुक्रवार को होने वाली RBI बोर्ड की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए सरप्लस ट्रांसफर को मंजूरी मिल सकती है। अनुमान है कि इस बार यह रकम ₹2.7 लाख करोड़ से ₹3.5 लाख करोड़ के बीच हो सकती है, जो पिछले साल के ₹2.69 लाख करोड़ के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगी।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल उठता है कि जब RBI शेयर मार्केट में लिस्टेड ही नहीं है, तो वह सरकार को डिविडेंड कैसे देता है और इसका कैलकुलेशन कैसे होता है? चलिए आसान भाषा में समझते हैं।
बिना शेयर मार्केट में लिस्ट हुए सरकार को कैसे मिलता है पैसा?
दरअसल, RBI अधिनियम, 1934 की धारा 47 के तहत यह प्रावधान है कि रिजर्व बैंक अपने सभी खर्चों, बैड डेट्स (डूबते कर्ज) के प्रोविजन और जरूरी फंड्स को अलग रखने के बाद, बचे हुए पूरे मुनाफे (Surplus) को केंद्र सरकार को सौंप देगा। चूंकि सरकार ही आरबीआई की एकमात्र मालिक है, इसलिए इस मुनाफे पर पूरा हक देश की जनता और सरकार का होता है।
RBI की कमाई कहां से होती है?
RBI कोई आम बैंक नहीं है, लेकिन इसकी कमाई के कई बड़े जरिए हैं:
विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves): RBI के पास डॉलर, यूरो जैसी विदेशी मुद्राएं होती हैं, जिन्हें वह विदेशी सरकारी बॉन्ड्स में इनवेस्ट करता है। वहां से मिलने वाला ब्याज इसकी कमाई का बड़ा जरिया है।
सरकारी बॉन्ड्स (Government Securities): RBI भारत सरकार के बॉन्ड्स खरीदता है और उन पर ब्याज कमाता है।
बैंकों को कर्ज (Liquidity Operations): जब देश के कमर्शियल बैंक (जैसे SBI, PNB) अपनी कैश की जरूरत के लिए RBI से 'रेपो रेट' पर कर्ज लेते हैं, तो RBI को भारी-भरकम ब्याज मिलता है।
डॉलर की खरीद-बिक्री: विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान डॉलर बेचने पर होने वाला मुनाफा।
कैसे होता है इस 'डिविडेंड' का कैलकुलेशन?
RBI के पास जो भी कमाई आती है, वह सीधे सरकार को नहीं दी जाती। इसके कैलकुलेशन के लिए 'बिमल जालान कमेटी' के फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है।
RBI को अपनी कुल संपत्ति का एक निश्चित हिस्सा (Contingent Risk Buffer - CRB) अपने पास 'इमरजेंसी फंड' के तौर पर सुरक्षित रखना होता है। यह बफर आमतौर पर 5.5% से 6.5% के बीच होता है।
कैलकुलेशन के वक्त, RBI अपनी कुल कमाई में से अपने कर्मचारियों की सैलरी, नोट छपाई का खर्च और इस 'इमरजेंसी फंड' (CRB) का हिस्सा अलग निकाल लेता है। इसके बाद जो शुद्ध मुनाफा (Surplus) बचता है, उसे 100% सरकार के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
सरकार के लिए क्यों संजीवनी है यह रकम?
इस बार मिलने वाला अनुमानित ₹3.5 लाख करोड़ तक का फंड सरकार के लिए 'राजकोषीय ढाल' (Fiscal Cushion) का काम करेगा। इससे सरकार को देश के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को कम करने में मदद मिलेगी, इंफ्रास्ट्रक्चर (सड़क, रेलवे, हाईवे) के विकास पर खर्च करने के लिए अतिरिक्त बजट मिलेगा और सरकार को बाजार से कम कर्ज लेना पड़ेगा, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

