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पीएम मोदी की आज बड़ी बैठक! वेस्ट एशिया संकट और कैबिनेट फेरबदल पर हो सकती है अहम चर्चा - डिटेल्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आज होने वाली अहम बैठक ने राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। वेस्ट एशिया संकट, तेल कीमतों और सरकार के भीतर संभावित बड़े बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सभी मंत्रियों की अनिवार्य मौजूदगी ने इस बैठक को और खास बना दिया है। आखिर अंदरखाने क्या चल रहा है?

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PM Modi cabinet meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 4 बजे दिल्ली के सेवा तीर्थ में पूर्ण मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। विदेश दौरे से लौटने के बाद यह उनका पहला बड़ा सरकारी कार्यक्रम होगा। बैठक में सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और राज्य मंत्रियों को मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

बैठक के समय और सभी मंत्रियों की अनिवार्य मौजूदगी ने इसकी अहमियत बढ़ा दी है। बिजनेस टुडे ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के मुताबिक, बताया कि दो मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं - वेस्ट एशिया में जारी तनाव और उसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर, साथ ही मोदी 3.0 सरकार की पहली वर्षगांठ से पहले संभावित कैबिनेट फेरबदल।

वेस्ट एशिया संकट पर सरकार की नजर

सूत्रों ने बताया कि सरकार लगातार कच्चे तेल की कीमतों, फ्यूल सप्लाई चेन और महंगाई की स्थिति की निगरानी कर रही है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बाद केंद्र सरकार आर्थिक प्रभावों को लेकर सतर्क है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय अनौपचारिक मंत्रिसमूह पहले ही गठित किया जा चुका है। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं।

राजनाथ सिंह हाल ही में कह चुके हैं कि सरकार स्थिति पर 'राउंड-द-क्लॉक मॉनिटरिंग' कर रही है। उन्होंने कहा था कि  'कच्चे तेल, ऊर्जा और एलपीजी को लेकर हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है। फिलहाल कोई खास समस्या नहीं है।'

विदेश यात्रा से लौटने के बाद पीएम मोदी अब सीधे इस पूरे हालात की रिव्यू कर सकते हैं और गुरुवार की बैठक को उसी औपचारिक समीक्षा का मंच माना जा रहा है।

कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज

बैठक का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। पिछले हफ्ते से ही कैबिनेट विस्तार और फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों का कहना है कि जून के दूसरे सप्ताह में, सरकार की पहली वर्षगांठ के आसपास, मंत्रिपरिषद में बदलाव हो सकते हैं।

सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने मंत्रालयों के कामकाज और प्रदर्शन की रिव्यू शुरू कर दी है। ऐसे में सभी मंत्रियों की यह बैठक इस अटकल को और मजबूत कर रही है कि फेरबदल पर चर्चा अब औपचारिक स्तर तक पहुंच रही है।