थीमैटिक या सेक्टोरल फंड्स: मार्केट करेक्शन में कहां लगाएं पैसा?
शेयर बाजार में लंबे समय से जारी करेक्शन के बीच कुछ सेक्टर निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, सही वैल्यूएशन और लंबी अवधि का नजरिया रखने वालों के लिए मौजूदा दौर में मौके बन सकते हैं। हालांकि, ऐसे निवेश में एंट्री और एग्जिट की टाइमिंग बेहद अहम है।

In Short
- लंबे मार्केट करेक्शन के बाद IT और BFSI के वैल्यूएशन हुए आकर्षक
- पांच साल का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए IT में दिख सकता है मौका
- थीमैटिक निवेश को पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा बनाने से बचने की सलाह
शेयर बाजार में लंबे समय से जारी करेक्शन के बीच निवेशकों के लिए कुछ चुनिंदा सेक्टर में मौके बनते दिख रहे हैं। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए मनीट्री पार्टनर्स के को-फाउंडर सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि ज्यादा रिस्क लेने वाले और कम से कम पांच साल के लिए निवेश करने वाले निवेशक IT और BFSI जैसे सेक्टर पर नजर रख सकते हैं। इन सेक्टर में आई गिरावट के बाद वैल्यूएशन पहले के मुकाबले बेहतर हुए हैं।
वैल्यूएशन सही हो तो बन सकता है मौका
सिद्धार्थ शर्मा के मुताबिक, थीमैटिक इन्वेस्टिंग में सबसे जरूरी बात सही वैल्यूएशन पर निवेश करना है। उनका कहना है कि IT और डिजिटल जैसे सेक्टर में काफी करेक्शन देखने को मिला है। ऐसे में मौजूदा वैल्यूएशन इन थीम्स को फिर से निवेशकों की नजर में ला सकते हैं।
बाजार के प्रमुख इंडेक्स लंबे समय से खास रिटर्न नहीं दे पाए हैं। ऐसे माहौल में निवेशक डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स के अलावा उन सेक्टर और थीम्स की तरफ भी देख सकते हैं, जो अगले रिकवरी साइकल में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
IT में पांच साल के लिए मौका?
IT सेक्टर में तेज करेक्शन के बाद सिद्धार्थ शर्मा इसे एक संभावित मौके के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, इसके लिए निवेशकों को उतार-चढ़ाव झेलने के लिए तैयार रहना होगा। उनके मुताबिक, जो निवेशक अगले पांच साल के लिए पैसा लगा सकते हैं, उनके लिए IT एक अच्छी थीम हो सकती है।
BFSI और बैंकिंग भी आकर्षक
IT के अलावा BFSI और बैंकिंग सेक्टर भी फोकस में हैं। बाजार में आई गिरावट के बाद इन सेक्टर के वैल्यूएशन भी आकर्षक हुए हैं। शर्मा के मुताबिक, फाइनेंशियल सेक्टर अब ऐसा स्पेस बन गया है, जहां निवेशक पैसा लगाकर उसे लंबे समय तक कंपाउंड होने का मौका दे सकते हैं।
पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा न बनाएं
हालांकि, थीमैटिक या सेक्टोरल फंड्स को पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा बनाना सही नहीं होगा। इनमें बेहतर रिटर्न देने की क्षमता हो सकती है, लेकिन जोखिम भी ज्यादा रहता है क्योंकि इनका प्रदर्शन बाजार के एक सीमित सेक्टर या थीम पर निर्भर करता है।
सिद्धार्थ शर्मा का कहना है कि ऐसे निवेश पोर्टफोलियो के सिर्फ बाहरी हिस्से यानी पेरिफेरल पार्ट में होने चाहिए और इनका प्रतिशत ज्यादा नहीं होना चाहिए। यानी पहले एक डायवर्सिफाइड कोर पोर्टफोलियो होना चाहिए और उसके बाद सीमित हिस्से में थीमैटिक निवेश किया जा सकता है।
एंट्री और एग्जिट की टाइमिंग अहम
थीमैटिक निवेश में सही सेक्टर चुनना ही काफी नहीं है। शर्मा के मुताबिक, एंट्री और एग्जिट दोनों बहुत टैक्टिकल होने चाहिए। ऐसे फंड उन निवेशकों के लिए ज्यादा सही हो सकते हैं, जो मार्केट साइकल को समझते हैं, ज्यादा उतार-चढ़ाव सह सकते हैं और लंबे समय तक निवेश बनाए रखने के लिए तैयार हैं।

