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कैसे चुनें थीमैटिक और सेक्टोरल म्यूचुअल फंड? एक्सपर्ट ने बताया ये 3 महत्वपूर्ण पॉइंट

थीमैटिक या सेक्टोरल फंड में निवेश करते समय सिर्फ पिछले शानदार रिटर्न को देखकर फैसला करना सही नहीं हो सकता। बिजनेस टुडे के शो में मनीट्री पार्टनर्स के को-फाउंडर सिद्धार्थ शर्मा ने बताया कि निवेशकों को फंड चुनते समय किन बातों पर ध्यान देना चाहिए और क्यों किसी एक थीम को पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा बनाने से बचना चाहिए।

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थीमैटिक और सेक्टोरल फंड में निवेश से पहले ध्यान रखें ये 3 बातें
थीमैटिक और सेक्टोरल फंड में निवेश से पहले ध्यान रखें ये 3 बातें

In Short

  • पिछले रिटर्न के आधार पर थीमैटिक फंड न चुनें।
  • थीमैटिक फंड को पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा न बनाएं।
  • निवेश से पहले थीम से जुड़े जोखिम को अच्छी तरह समझें।

म्यूचुअल फंड में खुद अपना निवेश मैनेज करने वाले निवेशकों के लिए सही फंड चुनना काफी अहम होता है। खासकर जब बात थीमैटिक या सेक्टोरल फंड की हो तो सिर्फ पिछले रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे फंड में पैसा लगाने से पहले कुछ अहम बातों को समझना जरूरी है।

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बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए मनीट्री पार्टनर्स के को-फाउंडर सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि थीमैटिक फंड में निवेश करते समय निवेशकों को पिछले प्रदर्शन के साथ उससे जुड़े जोखिम पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने निवेशकों को 3 अहम बातों का ध्यान रखने की सलाह दी।

1. पिछले रिटर्न को देखकर निवेश न करें

सिद्धार्थ शर्मा के मुताबिक अगर किसी थीम ने पहले 50% या 100% तक का रिटर्न दिया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आने वाले समय में भी उसी तरह का रिटर्न मिलेगा।

निवेशकों को किसी थीम के पिछले शानदार रिटर्न को देखकर आकर्षित होने से बचना चाहिए। पिछला प्रदर्शन भविष्य में मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं देता।

2. पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा न बनाएं

दूसरी अहम बात यह है कि थीमैटिक फंड को पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा बनाने से बचना चाहिए।

सिद्धार्थ शर्मा के मुताबिक अगर पोर्टफोलियो में थीमैटिक फंड की हिस्सेदारी ज्यादा हो जाती है तो निवेश में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इससे पूरे पोर्टफोलियो का जोखिम भी बढ़ सकता है।

3. थीम का जोखिम समझकर निवेश करें

तीसरी बात सही थीम के चुनाव से जुड़ी है। सिद्धार्थ शर्मा के मुताबिक हर थीम का अपना जोखिम और रिटर्न होता है। इसलिए किसी भी थीम में पैसा लगाने से पहले उससे जुड़े जोखिम को समझना जरूरी है।

कई बार शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन कर रहा होता है, लेकिन कोई खास थीम अच्छा प्रदर्शन नहीं करती। इसकी वजह सरकारी नीतियों से जुड़ा दबाव या अंतरराष्ट्रीय स्तर की समस्याएं हो सकती हैं।

ऐसे में निवेशकों को थीमैटिक या सेक्टोरल फंड चुनते समय सिर्फ पिछले रिटर्न पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। पोर्टफोलियो में उसकी हिस्सेदारी और उस थीम से जुड़े जोखिम को समझने के बाद ही निवेश का फैसला करना चाहिए।

Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। BT Bazaar अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।